आईआईएम काशीपुर ने किया ‘परिणाया प्रकृति प्रोटोटाइप’ का सफल परीक्षण

हल्द्वानी. भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) काशीपुर ने मानव-पशु संघर्ष के मुद्दे को हल करने के लिए डिज़ाइन इनोवेशन सेंटर (डीआईसी) के सहयोग से विकसित उत्पादों में से एक ‘परिणाया प्रकृति प्रोटोटाइप’ का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है।

आईआईएम की मीडिया एवं पब्लिक रिलेशन कमेटी की सदस्य आयुषी झा ने सोमवार को यूनीवार्ता को यह जानकारी दी।

नवशाय डी.आई.सी, आईआईएम, काशीपुर ने अपनी पहल के जरिए समाज में अच्छा प्रभाव डालने और राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनने का भी लक्ष्य रखा है। गत फरवरी माह में ‘प्रयास कार्यक्रम आयोजित करने वाले परिवर्तन क्लब के साथ  नवशाय ने मानव-वन्यजीव संघर्ष के मुद्दे को साझा किया है। देश से 800 से अधिक टीमों ने भाग लिया और दो दौर की व्यापक स्क्रीनिंग के बाद फाइनल के लिए 10 टीमों का चयन किया गया।

योजना का विचार बिट्स पिलानी के एक छात्र आलेलाई वेंधन ने दिया। इस विचार को बाद में डी.आई.सी, आईआईएम काशीपुर के समर्थन से कई दौर के पुनरावृत्तियों के बाद एक प्रोटोटाइप के रूप में विकसित किया गया। इस नए उत्पाद प्रोटोटाइप का नाम ‘परिणाया प्रकृति’ है। यह एक स्वचालित उत्पाद है जो जानवर की उपस्थिति को भांप लेता है और सायरन ध्वनि का उपयोग करके उन्हें दूर भगा देता है। यह बैटरी की ऊर्जा से काम करता है और भविष्य में इसे सौर ऊर्जा से भी संचालित किया जा सकता है। यह उत्पाद पीआईआर-आधारित सेंसर का उपयोग करता है और वर्तमान में 100 डिग्री के क्षेत्र दृश्य के साथ 12 मीटर की दूरी तय करता है।

प्रो. कुमकुम भारती, समन्वयक-नवाशाय ,डी.आई.सी, आईआईएम काशीपुर ने कहा, “आईआईएम काशीपुर में हमेशा व्यावहारिक वास्तविक जीवन की समस्याओं को हल करने के लिए समाज के साथ काम करने का प्रयत्न किया जाता है।”

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