भारत-चीन के बीच 10 घंटे चली बैठक फिर बेनतीजा, ठोस रोडमैप पर नहीं बनी सहमति

– करीब 10 घंटे हुई 8वें दौर की सैन्य वार्ता में ठोस रोडमैप पर नहीं बनी सहमति
– चीन ने फिर उठाया अहम चोटियों पर भारतीय सैनिकों की तैनाती का मसला
– सीमा से पीछे हटने की ​शर्तों को लेकर दोनों देशों के सैन्य कमांडर अड़े 

भारत

​नई दिल्ली। ​भारत और चीन के बीच शुक्रवार को करीब 10 घंटे हुई 8वें दौर की सैन्य वार्ता में भी दोनों देशों के रिश्तों पर जमी बर्फ नहीं पिघली। हालांकि छठे और सातवें दौर की बातचीत के बाद एलएसी पर यथास्थिति और सैन्य जमावड़ा नहीं बढ़ने को सकारात्मक माना जा रहा था। इसलिए इस वार्ता में गतिरोध कम होने की काफी उम्मीदें लगाई जा रही थीं। इसके विपरीत वार्ता में एलएसी पर तनाव कम करने या पीछे हटने को लेकर दोनों देशों के बीच किसी ठोस रोडमैप पर सहमति नहीं बन पाई।

भारत और चीन के बीच शुक्रवार को सुबह साढ़े नौ बजे एलएसी के पास भारतीय क्षेत्र की तरफ चुशूल में 8वें दौर की सैन्य वार्ता शुरू हुई। सेना की 14वीं कोर के नए कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन के नेतृत्व में चीन के सैन्य प्रतिनिधिमंडल के साथ शाम करीब 7 बजे तक बैठक चली। लगभग 10 घंटे चली मैराथन बैठक में उन रोडमैप पर भी सहमति नहीं बनी जो 12 अक्टूबर को हुई सातवें दौर की सैन्य वार्ता में चीन और भारत ने एक दूसरे को टॉप सीक्रेट ‘रोडमैप’ सौंपे थे। वैसे तो लद्दाख के अग्रिम क्षेत्रों में बर्फीली ठंड शुरू होने के बावजूद दोनों देशों के सैनिक एलएसी पर तैनात हैं लेकिन इस बैठक में रिश्तोंं पर जमी बर्फ पिघलने की उम्मीद थी। 

पिछले छठे दौर की बातचीत में भारत ने चीन पर दबाव बनाने के लिए 12 अधिकारियों की टीम भेजी थी। वार्ता की शुरुआत में ही भारत की ओर से स्थिति साफ कर दी गई कि वो एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे और अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे। भारत की तरफ से साफ कहा गया कि चीन को सीमा पर उन सभी जगह से पीछे जाना होगा, जहां-जहां वह आगे आया है। इस बैठक में भी चीन ने टकराव खत्म करने के लिए पैन्गोंग झील के दक्षिण किनारे की अहम चोटियों पर भारतीय सैनिकों की तैनाती का मसला उठाया गया। इस पर भारत के अधिकारियों ने चीन की बात यह कहकर सिरे से ख़ारिज कर दी कि ये पहाड़ियां भारतीय क्षेत्र में ही हैं, भारत ने एलएसी पार करके किसी पहाड़ी को अपने नियंत्रण में नहीं लिया है।

भारत ने साफ कर दिया कि डिसइंगेजमेंट होगा तो पूरी एलएसी पर होगा। ऐसी स्थिति में चीनी सेना को पैन्गोंग झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर 4-8 के पीछे जाना पड़ता लेकिन चीनी सेना इसके लिए तैयार नहीं हुई थी। बैठक में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच मॉस्को वार्ता में तय हुए पांच बिन्दुओं के आधार पर एक दूसरे से ‘रोडमैप’ मांगा गया।​ ​12 अक्टूबर को हुई सातवें दौर की सैन्य वार्ता ‘फिर मिलेंगे’ के वादे के साथ खत्म हुई थी। इसी बैठक में चीन और भारत ने एक दूसरे को टॉप सीक्रेट ‘रोडमैप’ सौंपा गया था​ जिस पर दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के मंथन करने के बाद आठवें दौर की सैन्य वार्ता में फोकस किया गया। इसके बावजूद किसी भी मुद्दे पर ठोस सहमति नहीं बन पाई।

​हालांकि ​​आठवें दौर की इस बातचीत के बारे में अब तक कोई औपचारिक बयान नहीं जारी किया गया है​ लेकिन सूत्रों का कहना है कि ​​चीन अभी भी पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी ​हिस्से से भारतीय सेना को ऊंचाई वाली जगह से हटने की बात कर रहा है।​​ ​छठे और सातवें दौर की बातचीत के बाद सीमा पर यथास्थिति ​बरकरार रखने ​और दोनों तरफ से सेना का अतिरिक्त जमावड़ा नहीं होने देने ​पर बनी सहमति ​को सकारात्मक माना जा रहा ​था। ​​इस बातचीत में ​भी ​दोनों पक्षों ने ​सीमा पर तनाव कम करने के लिए एलएसी से पीछे हटने पर सहमति जताई है लेकिन यह कैसा होगा, इस पर कोई सहमति नहीं बन पाई।​ दरअसल सीमा से पीछे हटने की ​शर्तों को लेकर दोनों कमांडर अड़े हुए हैं।

मैराथन बातचीत में किसी ठोस रोडमैप पर सहमति न​ बन पाने के बाद अब माना जा रहा है कि सैन्य स्तर पर जमी इस बर्फ को पिघलाने के लिए कूटनीतिक और विशेष प्रतिनिधि स्तर पर नए सिरे से वार्ता शुरू होगी।

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