कानपुर में अन्तरराज्यीय ठग गिरोह का भंडाफोड़, सरगना महिला समेत पांच गिरफ्तार

कानपुर। महानगर में बेरोजगारों से ठगी का एक बड़ा मामला प्रकाश में आया है। कानपुर पुलिस ने बुधवार को पांच शातिर ठगों को धर दबोचा,जिसमे एक महिला भी शामिल है। महिला ही गिरोह की मास्टर माइंड है। यह अन्तरराज्यीय गैंग अलग-अलग प्रदेशों के बेरोजगारों को नौकरी के नाम पर लाखों रुपये ठगते थे और बाद में फर्जी नियुक्ति पत्र दे देते थे।

पुलिस अधीक्षक दक्षिण दीपक भूकर ने बताया कि कानपुर देहात के रहने वाले रोहित कुमार ने जूही थाने में मुकदमा दर्ज कराया था कि रेलवे में क्लर्क नौकरी के नाम पर पांच लोगों ने करीब साढ़े आठ लाख रुपये की ठगी कर दी। इस पर नामजद अभियुक्तों की तलाशी के लिए जूही थाना प्रभारी संतोष कुमार आर्या की टीम को लगाया गया। इसके साथ ही टीम पीड़ित से बराबर संपर्क में रही।

बुधवार को पीड़ित रोहित ने सूचना दी कि पांचों अभियुक्त एक्स माल के पास हैं। सूचना पर टीम के साथ पहुंचे थाना प्रभारी ने पांचों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया। सघन पूछताछ में अभियुक्तों ठगी की बात को स्वीकार की और उनके पास से एसबीआई बैंक, भारतीय रेलवे, एनटीपीसी, इंडियन पोस्ट आफिस, भारतीय खाद्य विभाग, कृषि विभाग, आदि के कुल 32 फर्जी ज्वॉइनिंग लेटर विभिन्न प्रान्तों के बेरोजगार युवकों के बरामद हुए।

इसके साथ अभियुक्त दीपक पालीवाल व कुलदीप का फर्जी आधार कार्ड तथा अभियुक्त सुनील का रेलवे विभाग का फर्जी आई कार्ड बरामद हुआ। थाना प्रभारी ने बताया कि गिरफ्तार किये गये शातिर ठग अमरीन फातिमा उर्फ रीना खान मध्य प्रदेश, सुनील कुमार राजस्थान, दीपक कुमार उर्फ अश्वनी बागपत, विनय पाल सिंह दिल्ली, कुलदीप कुमार गाजियाबाद के रहने वाले हैं। इन सभी को जेल भेजा जा रहा है।

पूछताछ करने पर अभियुक्तों ने बताया कि बेरोजगार युवकों को विभिन्न विभागों में नौकरी लगवाने का लालच देकर उनसे लाखों रूपये लेते है तथा उनके फर्जी ज्वाइनिंग लेटर तैयार करा आवेदक को उपलब्ध कराते हैं। इसके बाद आवेदक को ट्रेनिंग करवाने का लालच देते हैं। ।

इस कार्य में अभियुक्त आमरीन फतीमा उर्फ रीना तथा पति कुलदीप सिंह द्वारा बेरोजगार युवकों को तलाशना व उनसे रूपये की ठगी करना, अभियुक्त दीपक पालीवाल व सुनील कुमार द्वारा आवेदक के फर्जी ज्वाइनिंग लेटर तैयार करना तथा अभियुक्त विनय पाल सिंह द्वारा आवेदक को ट्रेनिंग करवाने का कार्य किया जाता था। ठगी हुई लाखों की रकम का सभी अभियुक्तों में कार्य के हिसाब से बंटवारा होता है।

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