साल 2020 : कोरोना और फिर इतनी सारी कोरोना वैक्‍सीन

कोरोना
पत्रकार- विशाल सिंह

साल 2020 अलविदा कहने के लिए तैयार है। हालांकि यह साल पूरी दुनिया में कोरोना महामारी की वजह से लंबे समय तक याद रखा जाएगा। वहीं कोरोना महामारी की वैक्‍सीन को लेकर भी यह साल हमेशा चर्चा में रहेगा। दरअसल कोरोना महामारी के चलते डर के खौफ में जी रही पूरी दुनिया वैक्सीन का बेसब्री से इंतजार कर रही है।

ऐसे में अब पूरी दुनिया की निगाहें कोरोना वैक्‍सीन की खोज पर लगी हुईं हैं। साल 2020 में कई वैक्‍सीन को उपयोग में लाने के लिए स्‍वीकृति भी मिल गई है, वहीं कई के अभी भी ट्रायल चालू हैं। इसमें भारत का भी महत्‍वपूर्ण योगदान है। आइए जानते हैं अब तक जिन वैक्‍सीन से पूरी दुनिया उम्‍मीद लगाकर बैठी है, वह किस स्‍टेज में पहुंच गई हैं।

कोविशिल्‍ड वैक्सीन

भारत को सबसे ज्यादा उम्मीद ऑक्सफोर्ड और एस्‍ट्राजेनेका द्वारा विकसित की जा रही कोविशील्‍ड वैक्सीन से है। भारत में सीरम इंस्टीट्यूट इसे विकसित कर रहा है। ऑक्सफोर्ड ने इसे ट्रायल में प्रभावी बताया है। ऑक्सफोर्ड के अनुसार वैक्सीन की जिन दो डोज पर ट्रायल किया गया उनमें संयुक्त रूप से 70 फीसदी कामयाबी मिली। अगर अलग-अलग डोज की बात करें तो पहली डोज की सफलता 90 फीसदी और दूसरी डोज की 62 फीसदी तक रिकॉर्ड की गई है।

इसके ट्रायल में डोज को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं लेकिन फिर से ट्रायल होने जा रहा है जनवरी में इसके नतीजे भी आ जाएंगे। पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट में बड़े पैमाने पर इस वैक्सीन का डोज तैयार किया जा रहा है। इसकी कीमत भारत में हर डोज की 500 से 600 रुपये तक हो सकती है। भारत के अलावा ब्रिटेन समेत कई देशों और गरीब देशों को भी सस्ती कीमत पर इस वैक्सीन को उपलब्ध कराने का प्लान है।

कोवैक्‍सीन टीका

भारत सरकार के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी द्वारा हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक कंपनी के साथ मिलकर तैयार हो रहे स्वदेशी कोवैक्‍सीन पर भी काफी दारोमदार है। इस वैक्सीन का ट्रायल तीसरे फेज में हैं और इस फेज में 26,000 लोगों पर परीक्षण हो रहा है। ट्रायल के दौरान इसमें करीब 60 प्रतिशत से अधिक सफलता दर्ज की गई है। कंपनी की ओर से इस वैक्सीन की करीब 500 मिलियन डोज बनाने की तैयारी की जा रही है। सबसे खास बात है कि इसे स्टोर करने के लिए फ्रिजर की जरूरत नहीं है बल्कि इसे सामान्य फ्रीज में 2 से 8 डिग्री तापमान में भी रखा जा सकता है। भारत के ग्रामीण इलाकों और तीसरी दुनिया के देशों में भी इसे काफी कारगर माना जा रहा है।

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जायकॉव डी

अहमदाबाद स्थित जायडस कैडिला की लैब में तैयार जायकॉव डी वैक्सीन भारत की ऐसी तीसरी वैक्सीन है जिसे तीसरे फेज के ट्रायल की अनुमति मिल गई है। जाइडस कैडिला ने दो चरणों का ह्यूमैन ट्रायल पूरा कर लिया है उसके नतीजों के आधार पर वैक्सीन को प्रभावी बताया है। कंपनी के अनुसार लोगों को इस वैक्सीन की एक ही खुराक दी जाएगी।

जायडस कैडिला के चेयरमैन पंकज पटेल के मुताबिक, अभी लक्ष्य मार्च 2021 तक वैक्सीन का ट्रायल पूरा करने का है। इसके बाद उनकी कंपनी एक साल में 100 मिलियन खुराक का उत्पादन कर सकेगी। यह एक डीएनए वैक्सीन है और इंसानों के साथ-साथ कई अन्य जीवों पर भी इसका ट्रायल हो रहा है। भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी द्वारा फंडेड होने के कारण इस वैक्सीन की कीमत भी कम होने का अनुमान है।

स्‍पूतनिक वी वैक्सीन

रूस की स्पूतनिक वी का भी भारत में ट्रायल जारी है। इस वैक्सीन को बनाने वाली कंपनी का दावा है कि ट्रायल के दौरान यह 91.4 फीसदी प्रभावी पाई गई है। भारत में भी इस वैक्सीन का बड़े पैमाने पर उत्पादन होगा। भारत ने इस वैक्सीन की 10 करोड़ डोज बुक की है। भारत में हैदराबाद स्थित डॉ. रेड्डीज लैब इसका ट्रायल कर रही है। इस वैक्सीन को -18 डिग्री तक के तापमान में स्टोर किया जा सकता है।

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फाइजर की BNT162b2 वैक्सीन

अमेरिकी कंपनी फाइजर और जर्मन कंपनी बायो एंड टेक की कोरोना वैक्सीन ने पिछले हफ्ते तब तहलका मचा दिया जब ब्रिटेन में इसे मास लेवल पर टीकाकरण की अनुमति मिल गई। इस हफ्ते से ब्रिटेन में इस वैक्सीन का टीकाकरण शुरू होगा। बेल्जियम में तैयार होकर यह वैक्सीन ब्रिटेन पहुंच रही है। आरएनए बेस्ड इस वैक्सीन को ट्रायल में 95 फीसदी तक प्रभावी पाया गया है। फाइजर ने भारत में अपनी कोविड वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल के लिए भारतीय दवा नियामक- ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से अनुमति मांगी है। ब्रिटेन और बहरीन में पहले ही मंजूरी मिल गई है।

हालांकि, इस कोरोना वैक्सीन को स्टोर करने के लिए माइनस 70 डिग्री तक का तापमान चाहिए होगा जो कि भारत और अन्य देशों के लिए काफी मुश्किल टास्क होगा। इसी कारण भारत में फाइजर-बॉयोएनटेक वैक्सीन की बातचीत अभी प्रोसेस में है।

मॉडर्ना की mRNA-1273 वैक्सीन

अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना की वैक्सीन भी भारत के लिए बड़ी उम्मीद है। इस वैक्सीन का नाम mRNA-1273 है। मॉडर्ना और NIAID का दावा है कि उनकी वैक्सीन ने 94.5 फीसदी तक सफलता साबित की है। इस वैक्सीन को स्टोर करने के लिए -20 डिग्री तक का तापमान चाहिए। हालांकि ये वैक्सीन महंगी हो सकती है। 25 डॉलर से 37 डॉलर तक। इस वैक्सीन से तैयार इम्युनिटी का शरीर पर 3 से 4 महीने तक असर बना रह सकता है। कोरोना वैक्सीन को सस्ते में दुनियाभर में मुहैया कराने के लिए शुरू डब्ल्यूएचओ की कोवैक्स परियोजना के तहत यह वैक्सीन भारत आ सकती है।

बायोलॉजिकल ई की Ad26.COV2.S वैक्सीन

हैदराबाद की कंपनी बायोलॉजिकल ई लिमिटेड ने जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी के साथ इस वैक्सीन को विकसित करने के लिए समझौता किया है। यह सिंगल डोज वैक्सीन है। इस वैक्सीन के फेज 1 और फेज 2 का ट्रायल चल रहा है। फेज 1 में डोज को लेकर और फेज 2 में इसके प्रभाव को लेकर क्लीनिकल ट्रायल जारी है। 

जिनोवा बायोफार्मास्‍यूटिकल्‍स वैक्सीन

पुणे स्थित जिनोवा बायोफार्मास्‍यूटिकल्‍स द्वारा तैयार की जा रही आरएनए बेस्ड वैक्सीन से भी भारत को काफी उम्मीदें हैं। इस वैक्सीन को 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान में स्टोर किया जा सकता है।

चीन के वुहान से शुरू हुई कोरोना महामारी का कहर दुनियाभर में थमता हुआ नजर नहीं आ रहा। अब तक 6 करोड़ 70 लाख के आसपास संक्रमण के केस आ चुके हैं और 15 लाख से अधिक लोगों की इस वायरस के संक्रमण के कारण मौत हो चुकी है। अमेरिका और ब्राजील के साथ भारत में इस संक्रमण के मामले सबसे तेज हैं। देश में 97 लाख के करीब मरीज अबतक सामने आ चुके हैं और एक लाख 40 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। अब लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही कोरोना की वैक्सीन आएगी और उन्हें इस महामारी से राहत दिलाएगी।

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