किसान आंदोलन : दिल्ली हिंसा के बाद 100 से अधिक किसान लापता, परिजन परेशान

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कृषि कानूनों के खिलाफ 26 जनवरी यानि गणतंत्र दिवस के दिन लाल किले पर हुई हिंसक घटना के बाद से 100 से अधिक प्रदर्शनकारी किसान लापता हैं। अभी तक केवल 18 किसानों के बारे में पुलिस ने कंफर्म किया गया है कि उन्हें गिरफ्तार किया गया है, लेकिन बाकी किसानों का कुछ भी अता-पता नहीं चल रहा है, जिससे उनके परिवार वाले परेशान हैं।

कन्फर्म किए गए 18 किसानों में से सात लोग बठिंडा जिले के तलवंडी साबो उपमंडल के तहत आने वाले बंगी निहाल सिंह गांव के रहने वाले हैं। इन किसानों को दिल्ली पुलिस ने किसान रैली के दौरान लाल किले पर हिंसा के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि मोगा के 11 प्रदर्शनकारियों को नांगलोई पुलिस ने गिरफ्तार किया था, जिन्हें अब तिहाड़ जेल में डाल दिया गया है। मोगा के ही तातारी वाला गांव के 12 लोग 26 जनवरी की घटना के बाद से ही गायब हैं। उनका कुछ भी अता-पता नहीं है। सूत्रों का कहना है कि अलीपुर और नरेला क्षेत्र के आसपास से गिरफ्तारियां हुई हैं। मनजिंदर सिंह सिरसा ने आगे बताया कि एक घायल किसान सेंट स्टीफन अस्पताल में भर्ती है।

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पंजाब ह्यूमन राइट्स आर्गेनाईजेशन नाम के एनजीओ का कहना है कि पंजाब से दिल्ली में रिपब्लिक डे की किसान परेड के लिए आए  करीब सौ किसान गायब हैं। पंजाब ह्यूमन राइट्स आर्गेनाईजेशन के अलावा दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, खालरा मिशन और पंथी तालमेल संगठन जैसे विभिन्न संगठनों ने गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा के संबंध में दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता देने की घोषणा की गई है।

इनमें से अधिकांश को सार्वजनिक संपत्ति अधिनियम, प्राचीन स्मारकों और पुरातत्व स्थलों और अवशेष अधिनियम और महामारी रोग अधिनियम के तहत बुक किया गया है। भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के प्रमुख बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि किसान संघों को गणतंत्र दिवस परेड के बाद लापता हुए लोगों की सूची प्राप्त हुई हैं, जिनका सत्यापन किया जा रहा है।

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