गोपीचन्द नारंग को हिंदी उर्दू साहित्य अवार्ड कमेटी का लाइफटाइम अचीवमेण्ट अवार्ड

 सदियों में एक बार पैदा होता है फिराक 

लखनऊ। बहुआयामी प्रतिभा के धनी वेदों पर पकड़ रखने वाले संस्कृत और फारसी के विद्वान फिराक गोरखपुरी अंग्रेजी के प्रोफेसर थे, पर खड़ी बोली उर्दू के आशिक थे। उनकी शायरी में इंसानी तहजीब की सदियां बोलती हैं। ऐसा शायर भी सदियों में एक बार पैदा होता है।

उक्त बातें वयोवृद्ध उर्दू विद्वान डा.गोपीचन्द नारंग ने उर्दू जबान को जीने का एक सलीका बताते हुए फिराक के बारे में आनलाइन दी गई एक घण्टे लम्बी तकरीर में कहीं। डॉ नारंग रघुपति सहाय और फिराक गोरखपुरी पर केन्द्रित हिंदी उर्दू साहित्य अवार्ड कमेटी के 28वें पांच दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक सम्मेलन के पहले दिन दिल्ली में आयोजित समारोह में ‘लाइफटाइम अचीवमेण्ट अवार्ड’ प्राप्त कर रहे थे।

उद्घाटन समारोह में प्रतीकात्मक रूप से उन्हें यह सम्मान हमदर्द विश्वविद्यालय दिल्ली के कुलपति प्रो.एहतेशाम हसनैन की ओर से प्रदान किया गया। आयोजन कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए वजीर हसन रोड लखनऊ और दिल्ली में एक साथ सीमित आमंत्रित अतिथियों के सम्मुख और आनलाइन था। इस अवसर पर एक पुस्तक का विमोचन भी किया गया।

डा.नारंग ने फिराक के बहुत से शेर और रुबाइयां सुनाते हुए कहा कि वे मीर की परम्परा के शायर थे। स्त्री की अवधारणा को लेकर उन्होंने- ‘है ब्याहता पर रूप अभी कुंवारा है….’ जैसी रुबाइयों में नया अध्याय रचा है। भारतीय दर्शन की दृष्टि से देखें तो उन्होंने ‘है और नहीं है’ के बीच की कैफियत को अपनी शायरी में उभारा है।

इस अवसर पर अवार्ड कमेटी के महामंत्री व कार्यक्रम संयोजक अतहर नबी ने लखनऊ से सभी का स्वागत करते हुए फिराक के चंद किस्से कहे। उन्होंने बताया कि बगैर किसी सरकारी वित्तीय सहायता के कमेटी के संसाधनों से मार्च में लखनऊ, दिल्ली व मुम्बई में प्रस्तावित यह कार्यक्रम लाकडाउन के कारण टल गया था और अब इस अलग वृहद् रूप में आकार ले पाया है। कमेटी इससे पहले 27 आयोजन दोनो भाषाओं के प्रमुख रचनाकारों पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नियमित रूप से कराती रही है।

प्रो.एहतेशाम हसनैन ने कहा कि डा.नारंग की उर्दू साहित्य को जिस दृष्टि से बयान किया है वह नये रास्ते खोलती है। डा.अनीस अशफाक ने कहा कि प्रो.नारंग हमारे समय के उन बुद्धिजीवी और प्रतिष्ठित साहित्यकारों में से हैं जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी बौद्धिक क्षमता का परिचय दिया है। वह साहित्यकार, प्रखर वक्ता, कुशल विचारक और अनुभवी व्याख्याता है। वह बहुत सी ऐसी महत्वपूर्ण पुस्तकों के लेखक हैं जिन्होंने शायरी व कथा साहित्य की पुनव्र्याख्या में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की हैं। इनकी किताब साख्तियात पससाख्तियात और मशरिकी शेरियात ने उर्दू मे नई आधुनिक आलोचना की नींव डालकर इसे भविष्य के लिए मजबूत किया है।

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