भारतीय संस्कृति की धरोहर और विरासत हैं भगवान रामचंद्रः नितिन गडकरी

नई दिल्ली। भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या की संस्कृति और अवध की झलक दिखाने के लिए पिछले कुछ वर्षों से यहां अयोध्या पर्व का आयोजन हो रहा है। सोमवार 05 अप्रैल को इस तीन दिवसीय कार्यक्रम की शुरूआत के अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि  भगवान रामचंद्र हमारी संस्कृति की धरोहर और इतिहास की विरासत हैं।  उनका समूचा जीवन हमारे लिए प्रेरक है।

कॉस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि जब वह जर्मनी गए तो वहां पता चला कि हमारे वेदों और आयुर्वेद के बारे में वहां ज्यादा पढ़ाई हो रही है। इतना ही नहीं, इंडोनेशिया में तो मुसलमानों के घर में भी रामायण मिलते हैं। उन्होंनें कहा कि हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं कि हमारा धर्म और भगवान राम और उनकी संस्कृति कहाँ तक पहुंच गया है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह सड़कों के निर्माण के माध्यम से एक और काम कर रहे हैं कि सड़कों पर चलते हुए कैसे हमारी आने वाली पीढ़ियों को अपने इतिहास के बारे में  जानकारी मिल सके।  इस दिशा में वह  काम कर रहे हैं। उनका मंत्रालय उत्तर प्रदेश से मध्यप्रदेश तक राम गमन क्षेत्र बना रहा है। इसके अलावा राम जानकी मार्ग का निर्माण हो रहा है। अयोध्या से शुरू होकर नेपाल के जनकपुर तक इस मार्ग का निर्माण होगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमें अपने देश के इतिहास को लिखना है। नहीं तो हमारी आने वाली पीढ़ियां मैकाले का इतिहास पढ़ती रहेंगी।

कार्यक्रम के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के प्रवक्ता महंत कमल नयन दास ने कहा कि भगवान श्री राम के आदर्श को हमे जन जन तक पहुंचना है। अगर ये आदर्श जन जन तक पहुंचेगा तो समाज समृद्धशाली होगा। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने कहा कि अयोध्या पर्व समाज का पर्व है।उन्हें उनके एक परिचित ने बताया कि मलेशिया में जब कोई राष्ट्रपति प्रधानमंत्री या मंत्री शपथ लेता है तब भगवान राम चन्द्र के चरणों की शपथ लेता है।

कार्यक्रम के आयोजक सांसद लल्लू सिंह ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर बनेगा ये तो मन में था ही। हमने 84 कोशीय परिक्रम पर किताब भी लिखवाई है।  अयोध्या राम मंदिर के नाते विकसित हो रहा है।  इस कोरोना काल में भी हम इस कार्यक्रम को करने का हौसला मिला।

इससे पहले, विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि भगवान राम का जीवन मर्यादा से बंधा है।  किसी दूसरे को दोष न देकर जीवन जीना उन्होेंने सिखाया है। माता को जो वचन दिया वो वचन जंगल में भी निभाया। जब वह राजा बने तो अपने छोटे भाई को इस लिए दंडित करते हैं क्योकि राजाज्ञा का उलंघन हुआ। आज  राम की मर्यादा को समाज में लाने का की जरूरत है।

अयोध्या पर्व में संगोष्ठी और अन्य कार्यक्रमों का भी आयोजन होगा, जिसमें लोक परंपरा का भी प्रदर्शन होगा। यह अयोध्या पर्व का तीसरा आयोजन है जिसमें श्रीराम से जुड़े तीर्थस्थान और धार्मिक स्थलों की प्रदर्शनी लगाई गई है।

उल्लेखनीय है कि तीन दिनों तक चलने वाले इस पर्व में अयोध्या के सांस्कृतिक महत्व के बारे में सभी को जानकारी दी गई। कार्यक्रम और चर्चाओं के द्वारा अयोध्या की जानकारी और इतिहास को देशभर में पहुंचाने की योजना है। अलग-अलग स्टॉल पर लोकल कारीगरों की कला और उत्पाद को भी उपलब्ध करवाया गया है। इस कार्यक्रम के माध्यम से अयोध्या ही नहीं, पूरे अवध और यूपी की साझी सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जा रहा है। राम मंदिर का मॉडल, सरयू का जल और अयोध्या की मिट्टी यहां के आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं।

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