यूपी : लखनऊ पुलिस को मिली बड़ी सफलता, कुख्यात शूटर गिरधारी मुठभेड़ में ढेर

लखनऊ पुलिस

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस बड़ी सफलता हाथ लगी है। जहां पुलिस रिमांड पर लिए गए कुख्यात शूटर गिरधारी के पुलिस टीम पर फायर कर भागते वक्त हुए मुठभेड़ में घायल हो गया जिसकी लोहिया अस्पताल के ट्रामा सेंटर में उपचार के दौरान मौत हो गई।

दिल्ली में नाटकीय ढंग से गिरफ्तार शूटर गिरधारी उर्फ डॉक्टर को हत्या में प्रयुक्त असलहा बरामदगी हेतु पुलिस टीम सहारा हॉस्पिटल के पीछे खरगापुर क्रॉसिंग के पास ले गई थी। गिरधारी को लेकर जैसे ही गाड़ी रुकी, उप निरीक्षक अख्तर उस्मानी अपने साइड से गिरधारी को उतार रहे थे, तभी उसने उप निरीक्षक की नाक पर अपने सिर से वार कर दिया।अख्तर उस्मानी गिर गए और गिरधारी उनकी पिस्टल लेकर भागने लगा।

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वरिष्ठ उप निरीक्षक अनिल सिंह ने पीछा किया तो उनके ऊपर फायर करता हुआ वह झाड़ियों में भाग गया। जिसकी सूचना ब्रैवो कंट्रोल रूम व 112 पर दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस उपायुक्त पूर्वी आ गए, तभी प्रभारी निरीक्षक चंद्रशेखर सिंह व प्रभारी निरीक्षक अतिरिक्त चारों तरफ से झाड़ियों में घेरकर आत्मसमर्पण के लिए चेतावनी देने लगे लेकिन उसके द्वारा छीनी हुई सरकारी पिस्टल से बार-बार फायर किया गया।

पुलिस टीम की जवाबी कार्रवाई में गिरधारी को गोली लग गई। उसे तत्काल राममनोहर लोहिया अस्पताल के ट्रामा ले जाया गया। इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। कुख्यात शूटर गिरधारी उर्फ डॉक्टर के ऊपर कई संगीन मामले दर्ज थे। वाराणसी के तहसील में नितेश सिंह बबलू और लखनऊ में अजीत सिंह हत्याकांड में वह बतौर शूटर शामिल रहा था।

एक लाख का इनाम था हत्याकांड के समय

शूटर गिरधारी से वाराणसी पुलिस ने भी रविवार को विभूतिखंड कोतवाली में पूछताछ की थी। अजीत की हत्या से पहले वाराणसी में नितेश की हत्या में गिरधारी वांछित था। उस पर तब एक लाख रुपये इनाम भी घोषित हुआ था। इस मामले में साजिशकर्ता और अन्य बदमाशों के बारे में गिरधारी से कई जानकारियां पता करने के लिए वाराणसी पुलिस रविवार दोपहर को लखनऊ पहुंची थी।

दिल्ली में गिरधारी की गिरफ्तारी के बाद वाराणसी पुलिस दिल्ली गई थी लेकिन उसे रिमांड नहीं मिली थी। लखनऊ की तरह ही गिरधारी वाराणसी कोर्ट में भी नहीं गया था और वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए उसने अगली तारीख ले ली थी। पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर ने बताया कि गिरधारी के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज थे। उसने पुलिस पर भी गोली चलाई। सहारा अस्पताल के पास उसने भागने का प्रयास किया जिसमें मारा गया। इस हत्याकांड में शूटर रविदेव, मुस्तफा, अंकुर, राजेश तोमर और मददगार विपुल अभी फरार चल रहे हैं।

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