बेजुबानों की पीड़ा समझते हैं अनुराग, बेसहारा पशुओं का सहारा बना सायरो फार्म

शिवांगी सिंह

लखनऊ। बात अगर इंसानों के साथ क्रूरता की हो, तो पीड़ित इंसान के हक में आवाज उठाने के लिए हजारों लोग सामने आ जाते हैं, लेकिन एक बेजुबान किसी से भी अपने दर्द को साझा नहीं कर सकता। बात भले इस बेजुबान के साथ घरेलू या सरेराह क्रूरता की ही क्यों न हो। इनके साथ क्रूरता के कई मामले अक्सर ही हमारे सामने आते रहते हैं, लेकिन शायद ही मदद के लिए हाथ बढ़ाने वाले गिनतियों में हैं। हालांकि, हमारे बीच कुछ ऐसे लोग हैं, जो घायल और बेसहारा पशुओं की सेवा करने को ही अपना सबसे बड़ा धर्म समझते हैं। ऐसे ही एक शख्स हैं, अनुराग मिश्रा। जो मौजूदा समय में 150 से भी ज्यादा जानवरों की देखभाल कर रहे हैं।

बेजुबान पशुओं का बसेरा है सायरो फार्म

लखनऊ के मल्हौर स्टेशन रोड पर थासेमऊ में स्थित सायरो फार्म एक ऐसी संस्था है, जहां केवल घायल और बेसहारा पशुओं की ही देखभाल की जाती है। इस संस्था का संचालन अनुराग मिश्रा पिछले लगभग 30 सालों से कर रहे हैं इनके जीवन में पशुओं की सेवा ही सर्वोपरि है, यही वजह है कि वह अपने फार्म में मौजूदा सभी जानवरों का हालचाल लेने के बाद ही किसी और काम की शुरुआत करते हैं या यूँ कहें की उनके दिन शुभारम्भ ही बेज़ुबानों से मिलने के बाद होता है।

बकायदा डॉक्टर करते हैं इलाज

अनुराग मिश्रा ने बातचीत के दौरान बताया की यदि किसी भी अज्ञात और लावारिस जानवर के साथ कोई घटना हो जाती है उसे चोट लग जाती है तो खबर मिलते ही अनुराग मिश्रा खुद जाकर घटना स्थल से जानवर को फार्म ले आते हैं और अपने डॉक्टर से कंसल्ट कर के तत्काल जानवर  की  देखभाल और इलाज में लग जाते हैं। अगर बाद में कोई उस जानवर को अपना बताता है या मालिकाना हक जताता है तो वो बिना किसी नोक झोक के उसे वापिस भी कर देते हैं।

खुद से ही करते हैं फंडिंग

इतने बड़े फार्म को चलाने और पशुओं को खिलाने और उनके इलाज को लेकर अनुराग फंडिंग के लिए वह किसी पर आश्रित नहीं हैं। बल्कि खुद से ही वह फंड की व्यवस्था करते हैं और जानवरों की देखभाल करते हैं।

हजारों जानवरों की जान बचा चुके हैं अनुराग

अनुराग मिश्रा के मुताबिक अभी तक करीब 1000  घायल जानवरों का इस फार्म में इलाज किया जा चुका है और उन्हें बेहतर जिंदगी दी जा चुकी है। इस समय की बात करें तो छोटे और बड़े सब मिलाकर 150 से ज्यादा जानवर उनके फार्म में मौजूद हैं और इन सभी की देखभाल के लिए उनके पास कुल 7 लोगों की टीम है।

ऐसे हुई सेवा की शुरुआत

अनुराग मिश्रा बताते हैं कि इस फार्म की शुरुआत लगभग 30 साल पहले की थी। बताया कि, शुरुआत में उनका प्लान डेयरी फार्म खोलने  का था लेकिन इसी दौरान उन्होंने सोचा कि पशुओं से सिर्फ फायदा लेने के बजाय उन्हें कुछ दिया जाए। यही वजह है कि उन्होंने उसी दिन से पशुओं की सेवा करने का संकल्प लिया और धीरे-धीरे इस फार्म को बड़ा रूप देना शुरू किया।

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