मानव तस्करी के बड़े मामले का खुलाशा, 52 लोगों को बस से ले जाया जा रहा था तमिलनाडु

सूरजपुर। जिले के दूरस्थ अंचल बिहारपुर क्षेत्र में मानव तस्करी से जुड़ा बड़ा मामला सामने आया है। क्षेत्र से करीब 52 लोगों को बस से तमिलनाडु ले जाने के दौरान ग्रामीणों ने पुलिस व चाईल्ड लाइन की टीम को सूचना दी, जिसके बाद मानव तस्करी से जुड़े इस मामले का खुलाशा हुआ। 52 लोगों में 32 किशोर भी शामिल हैं।

इस मामले में सरगुजा सांसद व केंद्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह ने प्रदेश सरकार एवं जिला प्रशासन पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि सरकार आदिवासी गरीबों को रोजगार देने में असफल है। लोग पलायन को मजबूर हैं।

इस मामले में की पुष्टी जिले के सीडब्ल्यूसी (चाइल्ड लाइन) अधिकारी मनोज जायसवाल ने करते हुए कहा है कि मामले पर जांच की जा रही है। सभी किशोरों को कोविड-19 जांच के लिए जिला अस्पताल सूरजपुर भेजा गया है।

जानकारी के अनुसार देर रात जिले के ओड़गी विकासखंड अंतर्गत बिहारपुर क्षेत्र के ग्राम विशालपुर में तमिलनाडु प्रान्त की एक बस को लोगों ने देखा और रोककर चालक से पूछताछ की और जवाब नहीं देने पर इसकी सूचना पुलिस व सीडब्ल्यूसी को दी।

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बस को अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई समाचार लिखे जाने तक नहीं की है। पुलिस के अनुसार बच्चों को सीडब्ल्यूसी के समक्ष पेश किया गया है, जहां से आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जिला बाल सरंक्षण अधिकारी मनोज जायसवाल ने बताया कि विशालपुर में बच्चों के होने की जानकारी मिलने पर टीम वहां भेजी गई थी। सभी 32 बच्चों को सूरजपुर लाया जा रहा है जहां से उन्हें बाल सरंक्षण गृह भेजा जाएगा ओर बाद में परिवार की तस्दीक के बाद परिजनों को सौंप दिया जाएगा।

जानकारी के मुताबिक़ बस में सवार लोग बलरामपुर, सिंगरौली व बिहारपुर अंचल के हैं। इधर केंद्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह ने 52 मजदूरों को तमिलनाडु ले जाये जाने की जानकारी पर सरकार पर सवाल खड़े किए हैं।

रेणुका ने कहा है कि प्रदेश सरकार आदिवासी गरीबों को रोजगार देने में असफल है, जिससे सूरजपुर, बलरामपुर जिले से लोग पलायन को विवश है। उन्होंने कहा कि मजदूरों के पलायन में पुलिस की मिलीभगत की जांच होनी चाहिए।

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