शिक्षिका की मेहनत व लगन ने बदल दी प्राइमरी स्कूल की सूरत व सीरत

प्रतापगढ़। बच्चों को पढ़ाई के साथ संस्कार की बात बताना न भूलना, महापुरुषों के जन्मदिवस उनके आदर्शो और संस्कारों को बच्चों में समाहित करने का पूरा प्रयास करना डॉ प्रीति मिश्रा की पहली प्राथमिकता में रहता है। अपने आदर्श शिक्षण से डॉ प्रीति ने यह बता दिया कि प्राथमिक विद्यालय में अच्छी पढ़ाई कराई जाए तो नर्सरी की अधकचरी दुकानों में कोई जाने को मजबूर नहीं होगा।

बता दें कि डॉ प्रीति मिश्रा ने पिपरी खालसा के प्राथमिक विद्यालय में बतौर सहायक अध्यापक 3 नवंबर 2004 में ज्वाइन किया था। 2014 में उन्हें विद्यालय में हेड मास्टर के तौर पर नियुक्त कर दिया गया। विद्यालय को 2018 में अंग्रेजी माध्यम की मान्यता मिल गई। डॉ प्रीति पहले से ही विद्यालय की दशा सुधारने को लेकर प्रयास में थी। इंग्लिश मीडियम होते ही उनके उनकी सोच को उड़ान के लिए पंख मिल गए। दहाई की संख्या के बच्चों वाले प्राथमिक विद्यालय में डेढ़ सौ से अधिक संख्या वाले विद्यालय में बदल देने में डॉक्टर प्रीति को देर नहीं लगी। इसके पीछे उनकी कड़ी मेहनत और उनकी सोच को दाद देना पड़ेगा।

अपने वेतन से गरीब बच्चों के लिए किताबें व कपड़े देना उनकी बच्चों के प्रति समर्पण को दर्शाता है। जिले में दो बार प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरों के दौरान तत्कालीन बीएसए डॉ बीएन सिंह के कहने पर डॉ प्रीति द्वारा जो कैंप लगाया गया, उसका नेतृत्व प्राथमिक विद्यालय पिपरी खालसा के बच्चों ने संभाला। कई बच्चों ने जब यूपी के 75 जिलों का नाम क्रम से गिना दिया तो प्रदेश के मुखिया ने तारीफ की थी। लोग तो यहां तक भी कहते हैं कि तत्कालीन बीएसए बीएन सिंह को सीधे गोरखपुर का बीएसए बना कर ले जाने के पीछे भी इन्हीं प्राइमरी स्कूल के बच्चों के एवं डॉ प्रीति की मेहनत का परिणाम रहा।

दो दिन पूर्व एक बुजुर्ग अपने पोते शौर्य मिश्र जो कि बगल के सुशीला देवी कान्वेंट स्कूल में पढ़ता था, का नाम कटा कर प्राथमिक विद्यालय पिपरी खालसा में नामांकन कराने पहुंचे। डॉ प्रीति ने सबसे पहले बालक शौर्य मिश्र को बुजुर्ग दिवस के बारे में बताया और उसको अपने बाबा का चरण स्पर्श कराया। इसके बाद उसे संकल्प दिलाया कि वह अपने बड़े बुजुर्गों का आजीवन सम्मान करता रहेगा। डॉ प्रीति किसी भी आदर्श ऐतिहासिक महापुरुष के जीवन से संबंधित संपूर्ण दिवसों पर बच्चों को संकल्प संस्कार की शिक्षा देना प्राथमिकता में रखती हैं। विद्यालय में संसाधनों की कमी को इस शिक्षिका ने सामाजिक सहयोग के जरिये पूरा किया।

डॉ प्रीति की लगन से जल्द ही प्राथमिक विद्यालय पिपरी खालसा की सूरत और सीरत बदल गई। आसपास अंग्रेजी माध्यम के नर्सरी स्कूलों के दिन लग गए हैं। आजकल उनकी ‘ई पाठशाला’ भी चल रही है। विद्यालय में इनवर्टर की सुविधा हो या साफ सफाई की व्यवस्था सबकुछ दुरुस्त। आज इस विद्यालय में 169 छात्र शिक्षा ले रहे हैं। शिक्षा के साथ संस्कारों की ऐसी प्राइमरी पाठशाला जिले के अन्य प्राथमिक विद्यालयों के लिए आदर्श उदाहरण है।

Related Articles

Back to top button
E-Paper