दुर्लभ योगों में मनेगा महाशिवरात्रि का पर्व, शिवयोग में होगा शिव विवाह

इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 11 मार्च को मनाया जाएगा। इस दिन कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। शिवरात्रि पर भगवान शिव का विवाह शिव योग में होगा। इस धनिष्ठा नक्षत्र के साथ सिद्धि योग भी रहेगा।

श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष एवं प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ. मृत्युंजय तिवारी ने सोमवार को बताया कि शिवरात्रि के दिन से ही सृष्टि का प्रारंभ हुआ था। ईशान संहिता में बताया गया है कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को महानिशीथकाल में आदिदेव भगवान शिव करोड़ों सूर्यों के समान प्रभाव वाले लिंग रूप में प्रकट हुए थे। मार्कण्डेय पुराण, स्कन्द पुराण, पद्मपुराण, गरुड़ पुराण और अग्निपुराण आदि में शिवरात्रि का वर्णन मिलता है। कहते हैं कि शिवरात्रि के दिन जो व्यक्ति बिल्व पत्तियों से शिव जी की पूजा करता है और रात के समय जागकर भगवान के मंत्रों का जाप करता है, उसे भगवान शिव आनन्द और मोक्ष प्रदान करते हैं। फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का व्रत किया जाता है। चतुर्दशी तिथि 12 मार्च दोपहर 3.03 बजे तक ही रहेगी। इस बार चतुर्दशी तिथि में रात्रि का समय 11 मार्च ही रहेगा और शिवरात्रि में रात के समय चतुर्दशी तिथि का अधिक महत्व है, क्योंकि शिवरात्रि का अर्थ ही है शिव की रात्रि और चतुर्दशी तिथि पूरी रात रहेगी। इसीलिए महाशिवरात्रि का व्रत 11 मार्च को किया जाएगा। इस दिन भगवान शिव की पूजा से व्यक्ति को विशेष फलों की प्राप्ति होती है।

उन्होंने बताया कि 11 मार्च सुबह 9.24 बजे तक शिव योग रहेगा। उसके बाद सिद्धि योग लग जाएगा, जो कि  12 मार्च सुबह 8.29 बजे तक रहेगा। शिव योग में किए गए सभी मंत्र शुभफलदायक होते हैं। इसके साथ ही रात 9.45 बजे तक धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा।

महाशिवरात्रि की पूजा विधि

उन्होंने बताया कि शिवरात्रि के दिन सबसे पहले चन्दन के लेप से आरम्भ कर सभी उपचारों के साथ शिव पूजा करनी चाहिए, साथ ही पंचामृत से शिवलिंग को स्नान कराना चाहिए। इसके बाद ऊँ नम: शिवाय’ मंत्र का जाप करना चाहिए। साथ ही शिव पूजा के बाद गोबर के उपलों की अग्नि जलाकर तिल, चावल और घी की मिश्रित आहूति देनी चाहिए। इस तरह होम के बाद किसी भी एक खड़े फल की आहूति दें। सामान्यत: लोग सूखे नारियल की आहूति देते हैं। व्यक्ति यह व्रत करके, ब्राह्मणों को खाना खिलाकर और दीपदान करके स्वर्ग को प्राप्त कर सकता है।

सनातन धर्म के अनुसार शिवलिंग स्नान के लिये रात्रि के प्रथम प्रहर में दूध, दूसरे में दही, तीसरे में घृत और चौथे प्रहर में मधु, यानी शहद से स्नान करना चाहिए। चारों प्रहर में शिवलिंग स्नान के लिए मंत्र भी हैं- प्रथम प्रहर में-  ह्रीं ईशानाय नम:, दूसरे प्रहर में- ह्रीं अघोराय नम:, तीसरे प्रहर में- ह्रीं वामदेवाय नम:, चौथे प्रहर में- ह्रीं सद्योजाताय नम: ।। इन मंत्र का जाप करना चाहिए। दूसरे, तीसरे और चौथे प्रहर में व्रती को पूजा, अघ्र्य, जप और कथा सुननी चाहिए, स्तोत्र पाठ करना चाहिए।

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