त्रिपुरा निकाय चुनाव को रद्द करने के लिए अगरतला में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का आंदोलन

अगरतला.  त्रिपुरा में स्थानीय निकाय चुनाव के लिए गुरुवार को मतदान होने के दौरान हुए कथित हिंसा और कदाचार के विरोध में सैकड़ों मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) समर्थक और अगरतला नगर निगम (एएमसी) के उम्मीदवारों ने पश्चिम अगरतला पुलिस थाने के सामने धरना दिया।

उन्होंने पुलिस पर मतदान केंद्रों में सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकर्ताओं की मदद करने और उच्चतम न्यायालय के कई निर्देशों के बावजूद मतदाताओं और विपक्षी दलों के उम्मीदवारों को सुरक्षा प्रदान करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ नारेबाजी की। माकपा ने आरोप लगाया कि 13 शहरी स्थानीय निकायों के लिए हो रहे चुनाव के 644 मतदान केंद्रों में से 600 मतदान केंद्र से उनके मतदान कर्मियों को खदेड़ दिया गया।

    माकपा के राज्य सचिव जितेंद्र चौधरी ने आरोप लगाते हुए कहा, “निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए हम पिछले तीन दिनों से चुनाव अधिकारियों और पुलिस के पास अपनी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं लेकिन कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने खुले तौर पर गैर-भाजपा समूह को वोट न डालने की चेतावनी दी और हमने कार्रवाई की मांग करते हुए कुछ शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन कुछ नहीं हुआ। नतीजा यह रहा कि आज एक-एक मतदान केंद्र जंग के मैदान में तब्दील हुआ।”

    इस बीच, तृणमूल कांग्रेस के राज्य संयोजक सुबल भौमिक ने आरोप लगाया कि गुनाहगारों के बारे में जानकारी दिए जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि उसके विपरीत बाहर से आए भाजपा के कार्यकर्ताओं ने  विपक्षी मतदाताओं को खुलेआम धमकाया। उच्चतम न्यायालय के बार-बार निर्देश देने के बाद भी सत्ताधारी दल के इशारे पर चुनाव हुआ है।

    सुबल भौमिक ने कहा कि अगरतला नगर निगम क्षेत्रों में सात तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवारों को मतदान करने से रोका गया और पुलिस के सामने उन्हें बेरहमी से पीटा भी गया। राज्य में कल रात बाहर से आए भाजपा कार्यकर्ताओं के हिंसक हमलों में कम से कम 13 लोग घायल हुए हैं। इस दौरान मीडिया को भी स्वतंत्र रूप से अपना काम करने से रोका गया है।

उन्होंने कहा, “हम लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई सरकार की ऐसी गतिविधियों के खिलाफ उच्चतम न्यायालय से निर्देश चाहते हैं और अदालत की निगरानी में नए सिरे से चुनाव कराना चाहते हैं।”

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