सदस्यों का निलंबन दुर्भाग्यपूर्ण, किन्तु अपरिहार्य : एम. वेंकैया नायडु

नई दिल्ली। राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडु ने कहा है कि वे उच्च सदन, उसके नियमों, मानदंडों और गरिमा के प्रति अपने दायित्व से बंधे हैं। उन्होंने कहा कि सदस्यों का निलंबन दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन अपरिहार्य फैसला था। सदन के नियमों में अपरिहार्य स्थिति में ऐसे निलंबन का प्रावधान है।

 

राज्यसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करते हुए अपने समापन भाषण में श्री नायडु ने कहा कि यद्यपि विरोध करना विपक्ष का हक है फिर भी प्रश्न यही है कि इस अधिकार का प्रयोग कैसे और किस पद्धति से किया जाना चाहिए? उन्होंने कहा कि सदन ही प्रतिस्पर्धी विचारों और तर्कों को व्यक्त करने का सबसे सक्षम माध्यम है। लंबे समय तक किया गया बायकाट सदस्यों को उस अवसर से ही वंचित कर देता है।

विपक्ष के बायकाट किये जाने के बावजूद कृषि बिलों को पारित करने के संबंध में सभापति ने कहा कि पूर्व में भी ऐसे कई उदाहरण रहे हैं जब सदन की पूर्व निर्धारित कार्यसूची पर विचार किया गया तथा कुछ सदस्यों के बायकाट किये जाने के बावजूद भी बिलों को पारित किया गया। उन्होंने कहा कि यद्यपि सत्र के दौरान सदन की उत्पादकता संतोषजनक रही फिर भी कुछ ऐसे विषय हैं जो चिंताजनक हैं।

सभापति ने कहा कि सदन के इतिहास में पहली बार उपसभापति को हटाने के लिए नोटिस दिया गया, जो कि अंतत: अस्वीकार कर दिया गया क्योंकि इसके लिए आवश्यक 14 दिन की पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि इससे उन सभी को ठेस पहुंची होगी जो इस सदन की गरिमा और मर्यादा के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने सदस्यों से अपील की कि वे ध्यान रखें कि भविष्य में ऐसे दुर्भाग्यपूर्ण व्यवहार की पुनरावृत्ति न हो।

वेंकैया नायडु ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण राज्यसभा को अपना सत्र निर्धारित 18 बैठकों से 8 बैठक पहले ही समाप्त करना पड़ा। उन्होंने कहा कि असामान्य स्थितियाँ हमें जीवन की नई समान्यताऐं सिखा रही हैं। सत्र का संक्षिप्त विवरण देते हुए उन्होंने कहा कि 10 बैठकों में 25 विधयेक पारित हुए और 6 विधेयक स्थापित किये गये। इस सत्र में सदन की उत्पादकता 100.47% रही। विगत तीन सत्रों में सामान्यत: उत्पादकता ऊंची रही है। विगत 4 सत्रों में सदन की कुल उत्पादकता 96.13% रही है। 10 बैठकों में 1567 अतारांकित प्रश्नों के लिखित जवाब दिये गये। शून्यकाल में दौरान जनहित के 92 विषय तथा विशेष उल्लेख के माध्यम से जनहित के 66 मुद्दे उठाये गये।

Related Articles

Back to top button
E-Paper