कांग्रेस ने कहा- ‘अभी आपको कांग्रेस और राहुल गांधी जी से बहुत कुछ सीखना है मोदी जी’

मोदी सरकार ने कोरोना टीकाकरण के लिए केंद्र के स्तर पर टीके की खरीद करने और राज्यों को नि:शुल्क देने का ऐलान किया है। आज शाम पांच बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस फैसले की जानकारी दी। पहले राज्यों को 25 फीसदी टीका अपनी तरफ से खरीदना था। हालांकि, केंद्र सरकार के इस बदले हुए फैसले को मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने अपनी ओर से जनहित में बनाए गए दबाव का नतीजा बताया है।

पार्टी ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, ‘राहुल गांधी जी और कांग्रेस पार्टी लगातार यह मांग कर रही थी कि सभी देशवासियों का टीकाकरण मुफ्त हो, लेकिन मोदी सरकार ने अपना बोझ राज्यों पर डाल दिया था। खैर अब सरकार को अपनी गलती का एहसास हुआ है।’ इस ट्वीट के साथ मौजूद पोस्टर में लिखा था, ‘भारी दबाव के बाद मोदी सरकार ने मजबूर होकर फैसला किया है कि 21 जून से 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों का टीका राज्यों को मुफ्त उपलब्ध कराएगी।’

गौरतलब है कि कांग्रेस ने सोमवार को #भाषणनहींमाफ़ी_मांगो हैशटैग के साथ एक के बाद कई ट्वीट किए और इनमें केंद्र सरकार की टीकाकरण नीति पर सवाल उठाया गया। दरअसल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार टीकों की केंद्रीकृत खरीद की मांग काफी समय से कर रहे थे। 24 मई को ट्विटर पर उन्होंने लिखा था, ‘टीके की ख़रीद केंद्र करे और वितरण राज्य- तभी हर गांव तक वैक्सीन सुरक्षा पहुंच सकती है। ये सीधी-सी बात केंद्र सरकार को समझ क्यों नहीं आती?’

उन्होंने रोजाना होने वाले टीकाकरण की संख्या में कथित गिरावट का ग्राफ साझा करते हुए आरोप लगाया, ‘‘टीकाकरण महामारी पर नियंत्रण करने की कुंजी है, लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार इसकी परवाह नहीं करती।’’

राहुल गांधी के इन्हीं ट्वीट्स को आधार बनाकर कांग्रेस ने आज केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। ट्विटर पर लिखा, ‘गजब करते हैं प्रधानमंत्री जी। इतनी सी बात समझने और कहने के लिए आपको टीवी पर आना पड़ गया। राहुल गांधी जी का ट्विटर हैंडल चेक कर लिए होते सही समय पर। अभी आपको कांग्रेस और राहुल गाँधी जी से बहुत कुछ सीखना है मोदी जी…लगे रहिए।’

कांग्रेस ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, ‘प्रधानमंत्री आप मन की बात में इतने घनघोर व्यस्त हो जाते हैं कि काम की बात सुनते ही नहीं। राहुल गांधी जी लगातार यही तो कहते आ रहे थे कि वैक्सीन की जिम्मेदारी केंद्र उठाए। आप ना, सुना कीजिए प्रधानमंत्री जी। क्योंकि हम सिर्फ काम और देश की बात करते हैं।’

फिलहाल, टीकों के केंद्रीकृत खरीद के फैसले का सभी राज्यों ने स्वागत किया है। दरअसल, निजी टीका निर्माता कंपनियों ने राज्य सरकारों को टीके की आपूर्ति करने से इनकार कर दिया था। इसके साथ विपक्ष के अलावा सुप्रीम कोर्ट की तरफ से सरकार से एक टीके के तीन दाम को लेकर लगातार सवाल पूछा जा रहा था।

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