पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में 18 सितम्बर से आंदोलन

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में 18 सितम्बर से प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत सभी जनपदों व् परियोजनाओं में बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं की विरोध सभाएं होंगी। निजीकरण के विरोध में पूर्वांचल के सभी जनपदों में विगत 01 सितम्बर से विरोध सभाओं का क्रम चल रहा है।

 

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के विघटन व निजीकरण का फैसला वापस न लिया गया और इस दिशा में सरकार की ओर से कोई भी कदम उठाया गया तो ऊर्जा निगमों के तमाम बिजली कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर व अभियंता उसी समय बिना और कोई नोटिस दिए अनिश्चित कालीन आंदोलन प्रारंभ कर देंगे। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने इस मामले में सीएम योगी से प्रभावी हस्तक्षेप की अपील की है।

संघर्ष समिति के अध्यक्ष शैलेन्द्र दुबे ने ने कहा है कि निजीकरण का निर्णय संघर्ष समिति और ऊर्जा मंत्री की उपस्थिति में विगत 5 अप्रैल 2018 को हुए समझौते का खुला उल्लंघन है, जिसमें लिखा गया है कि बिजली कर्मचारियों को विश्वास में लिए बगैर प्रदेश में ऊर्जा क्षेत्र का कोई निजीकरण नहीं किया जाएगा। संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों का कहना है कि दिसंबर 1993 में ग्रेटर नोएडा क्षेत्र का निजीकरण किया गया और अप्रैल 2010 में आगरा शहर की बिजली व्यवस्था टोरेन्ट फ्रेंचाइजी को दी गई और यह दोनों ही प्रयोग विफल रहे हैं । इन प्रयोगों के चलते पावर कार्पोरेशन को अरबों खरबों रुपए का घाटा हुआ है और हो रहा है।

प्रतिनिधियों का कहना है कि जब वर्ष 2000 में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद का विघटन किया गया था तब सालाना घाटा मात्र 77 करोड़ था। विघटन के बाद कुप्रबंधन और सरकार की गलत नीतियों के चलते यह घाटा अब बढ़कर 95000 करोड़ रु से अधिक हो गया है। इसी प्रकार ग्रेटर नोएडा में निजीकरण और आगरा में फ्रेंचाइजीकरण के प्रयोग भी पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इन्हीं विफल प्रयोगों को एक बार फिर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम पर क्यों थोपा जा रहा है।

संघर्ष समिति ने विघटन और निजी करण के बाद कर्मचारियों की सेवा शर्तों पर पढ़ने वाले प्रतिगामी प्रभाव और उपभोक्ताओं के लिए बेतहाशा महंगी बिजली के रूप में आने वाली कठिनाई की ओर भी सरकार व प्रबंधन का ध्यान आकर्षित किया है । संघर्ष समिति ने निजीकरण के विरोध में अनिश्चितकालीन आंदोलन चलाने का निर्णय लिया है। इस क्रम में संघर्ष समिति के पदाधिकारी 21 सितम्बर से 20 अक्टूबर तक प्रदेश में मंडल मुख्यालयों पर विरोध सभाएं कर जन प्रतिनिधियों को ज्ञापन देंगे।

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