भारत चीन में युद्ध हुआ तो क्या होगा

Nirankar Singh

वरिष्ठ पत्रकार – निरंकार सिंह

भारत के लद्दाख, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश की चीन से सटी सीमाओं पर दोनों देशों की फौजें आमने सामने डटी हुई है। लद्दाख में कई बार चीनी सेना ने घुसपैठ करने की कोशिश की लेकिन हर बार भारतीय सेनाओं ने उसे वहां से भगा दिया और मजबूरन चीन को पीछे हटना पड़ा। लद्दाख में चीनी सेना की हरकतें इस पर मुहर लगाती है कि उसे उकसावे वाली कार्रवाई करने के लिए अपने शीर्ष नेतृत्व से निर्देश मिल रहे हैं। चीन की सेना लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जिस तरह यथास्थिति बदलने की कोशिश कर रही है, उससे यह जाहिर है कि वह बातचीत के जरिये समस्या सुलझाने और शांति बनाए रखने का ढोंग ही कर रहा था।

इस ढोंग का पता उन वार्ताओं की नाकामी से भी चलता है जो सीमा पर तनाव दूर करने के लिए होती रही हैं। चूंकि चीन ने इन वार्ताओं में बनी सहमति के हिसाब से कदम उठाने से इन्कार किया, इसलिए इसमें रत्ती भर भी संदेह नहीं कि वह भारत की आंखों में धूल झोंकने की फिराक में है। वह बातचीत के बहाने समय जाया करने के साथ ही अपने अतिक्रमणकारी रवैये को बरकरार रखना चाह रहा है। इसके पीछे उसका मकसद भारत को सीमा पर उलझा कर उसके विकास की गति को रोकना है। हांलाकि यह विवाद कभी भी युद्ध का रुप ले सकता है।

चीन जिस विस्तारवादी नीति को लेकर आगे बढ़ रहा है, वही उसके लिए बड़ी मुसीबत का कारण बन सकती है। चीन के अपने पड़ोसी देशों से संबंध कभी भी ठीक नहीं रहे हैं। विस्तारवादी नीति के कारण भारत के साथ ही रूस, जापान, नेपाल, भूटान, वियतनाम, ताइवान, दक्षिण कोरिया, र्किगस्तान, तजाकिस्तान, मंगोलिया सहित लगभग सभी पड़ोसी देशों के साथ चीन का सीमा विवाद है। ऐसे में रूस को छोड़कर कोई भी देश ऐसा नहीं है जो चीन को माकूल जवाब दे सके। यही कारण है कि चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है।

चीन को जवाब देने की ताकत किसी देश के पास है तो वह भारत ही है। यदि युद्ध हुआ तो इन देशों के पास भारत के साथ मिलकर चीन को चुनौती देने के अलावा कोई चारा नहीं है। चीन का मजबूत होना इन देशों के लिए मुश्किल हालात पैदा कर सकता है। भारत जापान के बीच सैन्य समझौता भी हो चुका है। जापान का अमेरिका से सैन्य समझौता है। युद्ध हुआ तो तीनों देश मिलकर चीन पर हमला करेंगे। रणनीतिक  दृष्टि से भारत ने सीमा पर पर्वतों की ऊंची चोटियों पर अपनी पोजीशन ले ली है, इसलिए वह काफी मजबूत स्थिति में है। कोई भी युद्ध एकतरफा नहीं जीता जा सकता है। युद्ध में दोनों देशों को क्षति होगी, लेकिन अंतिम विजय भारत की ही होगी।

Indo-China

एक अनुमान के मुताबिक, वैश्विक व्यापार का करीब 3.37 लाख करोड़ डॉलर का  वार्षिक व्यापार दक्षिण चीन सागर से होता है। यह वैश्विक समुद्री व्यापार का करीब एक तिहाई है। चीन के कुल व्यापार का 39.5 फीसद और ऊर्जा आयात का 80 फीसद यहीं से होता है। विश्व व्यापार पर अपनी पकड़ खो रहा अमेरिका कभी नहीं चाहेगा कि इस व्यापार मार्ग पर चीन का दबदबा मजबूत हो। भारत और चीन के बीच यदि युद्ध हुआ और यदि इसमें चीन जीतता है (हालांकि आज की परिस्थितियों में यह असंभव है) तो चीन और मजबूत होगा और इस पर उसके दावे को चुनौती देना किसी के लिए भी संभव नहीं होगा। अमेरिका सहित अन्य देशों के लिए निर्बाध व्यापार के लिए चीन का दबदबा कम होना जरूरी है। ऐसे में दुनिया के शक्ति संपन्न देशों का साथ भारत को मिल सकता है।

दुनिया के बड़े देश इस बात को बखूबी समझ रहे हैं कि दुनिया में चीन इकलौता देश है, जिसे रोकना हर किसी के लिए जरूरी है।फिर चाहे वह अमेरिका हो या ब्रिटेन, फ्रांस, आस्टे्रलिया या फिर जापान। इन देशों के साथ चीन का किसी न किसी मुद्दे पर विरोध है। ऐसे में चीन भारत के खिलाफ आक्रामकता का प्रदर्शन कर रहा है, जिसके जरिये वह नासमझी और मूर्खता के नए पैमाने गढ़ रहा है। यदि चीन ने भारत के साथ युद्ध की हिमाकत की तो यह उसके लिए किसी बुरे स्वप्न की तरह होगा जो उसकी आने वाली पीढ़ियों तक को कचोटा रहेगा।

दुनिया की सबसे बड़ी सेना के सामने दुनिया की सबसे पेशेवर और पराक्रमी सेना से मुकाबले की चुनौती होगी। 2017 में डोकलाम विवाद में चीन को पीछे हटना पड़ा था और ताजा मामला गलवन का है। जहां भारतीय सैनिकों ने अपने 20 शहीदों का बदला लेने के लिए 40 से ज्यादा चीनी सैनिकों को मार गिराया था। इतना बड़ा नुकसान होने के बावजूद चीन मरने वाले अपने सैनिकों की संख्या तक बताने का साहस नहीं कर सका। यह बताता है कि चीन आक्रामकता का प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन अंदर ही अंदर डरा हुआ है। वह जानता है कि युद्ध हुआ तो उसे बड़ी कीमत चुकानी होगी।

1962 के युद्ध में भारत की हार को चीनी सरकार के पिट्ठू अक्सर उठाते रहे हैं। इसके जरिये वे भारत को चीन के सामने बौना करने की कोशिश में रहते हैं। हालांकि 2020 की परिस्थितियां बिलकुल विपरीत है। रणनीतिक लिहाज से भारत अब चीन का सामना करने के लिए तैयार है। उस पर एक परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र पर हमला करना चीन के लिए तेजाब में हाथ डालने जैसा होगा। भारत के समक्ष अब न हथियारों की समस्या है और न ही दुनिया के सबसे ऊंचे इलाकों में से एक में लड़ने के लिए उसके सैनिकों के पास कौशल की कमी है।

भारत ने पिछले कुछ सालों में सीमावर्ती इलाकों में अपनी रणनीति को बदला है और वहां पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण निर्माण कार्य किए हैं। जिनमें लड़ाकू विमान उतारने के लिए हवाई पट्टियों से रणनीतिक महत्व की सड़कों का जाल बिछाने तक बहुत सी चीजें शामिल हैं।

भारतीय सेना ने एक बार फिर एलएसी पर चीन की गुस्ताखी का मुंहतोड़ जवाब दिया है। गलवान में भारत ने चीन के गुरूर की गर्दन तोड़ी थी और अब पैंगोंग में चीन की कमर तोड़ने का काम भारतीय सेना ने किया है। चीन ने एलएसी पर अतिक्रमण की कोशिश की है। भारतीय सैनिकों ने बेहद फुर्ती से कार्रवाई करते हुए पेंगांग झील के दूसरे किनारे पर भी फिंगर एरिया की तरह घुसपैठ करने की कोशिश को नाकाम कर दिया है। चुशूल इलाके में चीनी सैनिकों की तैयारियों को भांपकर भारतीय सैनिकों ने 29-30 अगस्त की रात को पहले ही कार्रवाई कर उन्हें पीछे धकेल दिया।

चीनी सेना ने पेंगांग झील के पश्चिमी किनारे पर मई के महीने में घुसपैठ की थी और फिंगर 4 तक के इलाके पर कब्जा कर लिया था। पिछले तीन महीने से ज्यादा समय से दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के सामने डटी हुई हैं। यहां से चुशूल का रास्ता जाता है जो भारतीय सेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। चुशूल से ही डेमचैक, कोइल, हनले जैसे गांवों का रास्ता निकलता है जहां चीनी सेना अक्सर घुसपैठ की कोशिश करती रहती है। चुशूल में भारतीय वायुसेना की एयर स्ट्रिप है और सेना का महत्वपूर्ण मुख्यालय है। l

पूर्वी किनारे का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि यहां से तिब्बत जाने के  लिए कई चैड़े रास्ते हैं जहां से टैंक या बख्तरबंद गाड़ियां भी ले जाई सकती हैं। चीन की गंदी नजर सिर्फ गलवान और पेंगांग पर ही नही है। वह दुनिया में बहुत सारी जमीनों को हड़पने की साजिश में लगा हुआ है।

अपने बारह पड़ौसी देशों की जमीन हड़पने के बाद भी  चीन की लालची नजर ढाई सौ अन्य द्वीपों को भी हड़प जाने की है। साउथ चाइना सी को लेकर क्यों चीन की लार टपकती है, ये बात अब सारी दुनिया को समझ में आ गई है। दरअसल साउथ चाइना सी में करीब 250 द्वीप हैं और इन सभी पर चीन कब्जा करना चाहता है। ये तो अच्छा हुआ कि वक्त पर चीन का असली चेहरा दुनिया के सामने आ गया और सारी दुनिया चीन के खतरे को समझ कर उसके खिलाफ गोलबन्द हो गई है वरना ये ड्रैगन धीरे-धीरे सारी दुनिया को खा जाने की साजिश में लगा था।

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