नई ड्रोन नीति से नहीं पड़ेगा सुरक्षा घेरे पर असर

नई ड्रोन नीति से नहीं पड़ेगा सुरक्षा घेरे पर असर

मुंबई। केंद्र सरकार ने गुरुवार को नई ड्रोन नीति घोषित की। पिछली ड्रोन की आतंकी घटनाओं को देखते हुए सवाल उठ रहे हैं कि नई ड्रोन नीति सुरक्षा के लिहाज से कितनी कारगर होगी। सेना के अधिकारियों की मानें तो इस नई नीति से देश के सुरक्षा घेरे पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बिना अनुमति फ्लाइंग जोन में ड्रोन या यूएवी को महत्वपूर्ण स्थानों, संवेदनशील इलाकों और भारतीय सेना के ठिकानों पर उड़ानों की इजाजत नहीं होगी।

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की बात करें तो यह महानगर सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। मुंबई की सुरक्षा व्यवस्था में तय किए गए मापदंडों और नियमों के अनुसार बिना अनुमति ड्रोन अथवा मानवरहित हवाई वाहन (यूएवी) को उड़ाने की इजाजत नहीं है। गत महीने पहले जम्मू कश्मीर के वायु सेना के एयरबेस पर आतंकवादियों द्वारा ड्रोन से बम धमाके किए गए थे। पाकिस्तान की ओर से ड्रोन से निगरानी की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इस लिहाज से मुंबई की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखा गया है। मुंबई हवाई अड्डे, पुलिस आयुक्तालय, भारतीय नौसेना के प्रतिष्ठानों की परिधि से तीन किलोमीटर के क्षेत्र को “नो फ्लाई जोन” के रूप में घोषित किया गया है। किसी व्यक्ति या सिविल एजेंसियों को इन क्षेत्रों के भीतर किसी भी हवाई ऐसे हवाई वस्तुओं को देखते ही नष्ट कर दिया जाएगा। साथ ही संबंधितों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। भारतीय नौसेना के जनसंपर्क अधिकारी मेहुल कर्णिक के अनुसार ड्रोन के उपयोग को लेकर गृह मंत्रालय द्वारा समय-समय पर संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। नियम से ड्रोन और यूएवी की उड़ान के लिए इजाजत लेनी पड़ती है। नागरिक उड्डयन महानिदेशक (डीजीसीए) से अनुमोदन प्राप्त करके उसकी एक प्रति निर्धारित उड़ान संचालन से एक सप्ताह पहले मुख्यालय, पश्चिमी नौसेना कमान के पास जमा की जानी चाहिए। भारतीय नौसेना किसी भी हवाई ड्रोन या यूएवी को बिना पूर्व अनुमति के इन क्षेत्रों में उड़ान भरने या नष्ट करने का अधिकार सुरक्षित रखती है। यह दिशानिर्देश कायम रहेगा। सेना के कुछ अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल अभी नई पॉलिसी क्या है, उसका अध्ययन हमारे एक्सपर्ट करेंगे। सेना के ठिकानों की सुरक्षा के लिहाज से जारी किए गए निर्देश लागू ही रहेंगे। अन्य ठिकानों पर अनुमति लेकर ड्रोन या यूवीए जैसी उड़ाने हो सकती हैं।

केंद्रीय सरकार की ओर से घोषित की गई नई ड्रोन पॉलिसी में ड्रोन उड़ाने को लेकर कई नियमों में बदलाव किया गया है। उड्डयन मंत्रालय ने ड्रोन संचालित करने के नियमों में ढील दे दी है। केंद्र सरकार की ओर से दावा किया गया है कि नए ड्रोन नियम स्टार्ट-अप और काम कर रहे हमारे युवाओं की काफी मदद करेंगे। यह नवाचार और व्यापार के लिए नई संभावनाएं खोलेगा। यह भारत को ड्रोन हब बनाने के लिए नवाचार, प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग में भारत की ताकत का लाभ उठाने में मदद करेगा। नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का मानना है कि इस समय सड़क पर चलने वाली टैक्सियों की तरह ड्रोन नीति के तहत हमें भी हवा में टैक्सियां नजर आ सकती हैं।

ड्रोन की नई नीति में प्रावधान किया गया है कि सभी ड्रोन प्रशिक्षण और परीक्षा एक अधिकृत ड्रोन स्कूल द्वारा की जाएगी। डीजीसीए प्रशिक्षण आवश्यकताओं को निर्धारित करेगा, ड्रोन स्कूलों की निगरानी करेगा और ऑनलाइन पायलट लाइसेंस प्रदान करेगा। नो परमिशन-नो टेक-ऑफ” (एनपीएनटी), रीयल-टाइम ट्रैकिंग बीकन, जियो-फेंसिंग आदि जैसी सुरक्षा सुविधाओं को भविष्य में अधिसूचित किया जाएगा. अनुपालन के लिए कम से कम छह महीने का समय दिया जाएगा।

हवाई अड्डे की परिधि से 8 से 12 किमी के बीच के क्षेत्र में ग्रीन जोन और 200 फीट तक के क्षेत्र में ड्रोन के संचालन के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है। सभी ड्रोन का ऑनलाइन पंजीकरण डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म के माध्यम से होगा। ड्रोन के ट्रांसफर और डीरजिस्ट्रेशन के लिए निर्धारित आसान प्रक्रिया होगी। कार्गो डिलीवरी के लिए ड्रोन कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। भारी पेलोड ले जाने वाले ड्रोन और ड्रोन टैक्सियों को शामिल करने के लिए ड्रोन नियम, 2021 के तहत ड्रोन का कवरेज 300 किलोग्राम से बढ़ाकर 500 किलोग्राम कर दिया गया है। फॉर्म/अनुमति की संख्या 25 से घटाकर 5 कर दी गई है। किसी भी पंजीकरण या लाइसेंस जारी करने से पहले किसी सुरक्षा मंजूरी की आवश्यकता नहीं है। अनुमतियों के लिए शुल्क नाममात्र के स्तर तक घटाया गया है। ड्रोन नियम, 2021 के तहत अधिकतम जुर्माना घटाकर 1 लाख रुपये किया गया है। लेकिन यह अन्य कानूनों के उल्लंघन के संबंध में दंड पर लागू नहीं होगा। डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म पर हरे, पीले और लाल क्षेत्रों के साथ इंटरएक्टिव हवाई क्षेत्र का नक्शा प्रदर्शित किया जाएगा। येलो जोन एयरपोर्ट की परिधि से 45 किमी से घटाकर 12 किमी किया गया। अद्वितीय प्राधिकरण संख्या, अद्वितीय प्रोटोटाइप पहचान संख्या, अनुरूपता का प्रमाण पत्र, रखरखाव का प्रमाण पत्र, ऑपरेटर परमिट, अनुसंधान और विकास संगठन का प्राधिकरण, छात्र दूरस्थ पायलट लाइसेंस, दूरस्थ पायलट प्रशिक्षक प्राधिकरण, ड्रोन पोर्ट प्राधिकरण, ड्रोन घटकों के लिए आयात की अनुमति दी गई है।

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