अब बिहार चुनाव में श्रीकृष्ण जन्‍मभूमि बनेगी चुनावी मुद्दा? मंत्री के बयान से गरमाया मामला

सत्यप्रकाश त्रिपाठी

नई दिल्ली। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्‍मभूमि का मामला अदालत पहुंच गया है। मथुरा की एक अदालत में याचिका स्वीकार करके 30 सितंबर से सुनवाई प्रक्रिया शुरु करना सुनिश्चित किया गया है। अचानक अखाड़ा परिषद की सक्रियता से याचिका दायर करने की समयावधि से लेकर उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री श्रीकांत शर्मा के बयान पर कहा जा रहा है कि बिहार चुनाव में मुददा बनाने की कोशिश है। इस बीच अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा की तरफ से याचिका दायर करने पर सवाल खड़ा कर दिया गया है। महासभा की तरफ से कहा गया है कि मथुरावासी शांति से रहना चाहते हैं।

श्रीकृष्ण जन्‍मभूमि

कांग्रेस के नेता उदित राज ने कहा कि बिहार चुनाव के पहले मथुरा और काशी मामले को गरमा कर हिंदुत्व के एजेंडे को धार दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अचानक इस मुददे को गरमा कर बिहार चुनाव के डेढ साल बाद होने वाले उत्तर प्रदेश चुनाव में हिंदुत्व को आगे बढाया जायेगा। जिसे इन दो राज्यों के अलावा 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में भुनाया जा सके। सुप्रीम कोर्ट के वकील रविंद्र कुमार ने कहा कि मथुरा में याचिका दायर करने की समयावधि बिहार चुनाव के ठीक पहले क्यों रखी गई? फिर यूपी सरकार के मंत्री अपने जिम्मेदारी से क्यों भाग रहे हैं? भाजपा हमेशा से कहती रही है कि अयोध्या के बाद काशी और मथुरा की मांग नहीं की जायेगी। देश का मुसलमान भी इस पर राजी हो गया था। अब अयोध्या का फैसला आने के बाद भाजपा क्यों मुकर रही है?

इस महीने की शुरुआत में प्रयागराज में अखाड़ा परिषद की बैठक में मथुरा श्रीकृष्ण जन्‍मभूमि को मुक्त कराये जाने की बात कही गई थी। उसके बाद ही बीते शुक्रवार को याचिका दायर कर दी गई। जिसमें 1968 में हुए समझौते को गलत बताया गया है। कोर्ट से आग्रह किया गया है कि पूरी जमीन को श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान को दे दिया जाए। इस मामले में यूपी के सरकार के मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बयान भी आ गया है, जिसमें कहा गया है कि हर किसी को अपने धर्म का अनुसरण करने की छूट है। मथुरा में याचिका दायर होने के बारे उन्होंने कहा कि उसका सरकार से कोई लेना-देना नहीं है। देश में लोकतंत्र है और कोई भी केस दायर कर सकता है।

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