एक देश, एक वैक्सीन तो फिर तीन दाम क्यों – प्रियंका गांधी

मोदी सरकार की वैक्सीन आवंटन और दाम तय करने की नीति पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट भी अलग-अलग दाम पर सवाल उठा चुका है। अब विपक्ष ने भी अपने सवाल तेज कर दिए हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने ‘जिम्मेदार कौन’ अभियान के तहत वैक्सीन उत्पादन के बाद अब केंद्र सरकार की वैक्सीन वितरण नीति पर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार अब तक सिर्फ तीन फीसदी अबादी का ही फुल वैक्सीनेशन यानी टीके की दोनों खुराक लगा पाई है, जो कोरोना के खिलाफ जरूरी सुरक्षा कवच तैयार करने वाले वैक्सीनेशन टारगेट से बहुत पीछे है। उन्होंने कहा कि यह हैरानी की बात है कि जब मोदी सरकार को वैक्सीन वितरण की व्यवस्था को और मजबूती से अपने हाथों में लेना चाहिए था, तब उसने अपनी जिम्मेदाली से पल्ला झाड़ते हुए वैक्सीनेशन की सारी जिम्मेदारी राज्य सरकारों के ऊपर डाल दिया।

प्रियंका गांधी ने आगे कहा कि मोदी सरकार ने दिसंबर तक सबको वैक्सीन देने का दावा तो किया है, लेकिन इस लक्ष्य को पाने के लिए रोजाना 70-80 लाख वैक्सीन लगाने की जरूरत पूरी करने की कोई योजना देश के सामने नहीं रखी है। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने तो अप्रैल तक लगभग 34 करोड़ वैक्सीनों का ही ऑर्डर दिया था।

प्रियंका गांधी ने वैक्सीन के तीन अलग-अलग दामों को लेकर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब वैक्सीन देशवासियों को ही लगनी है तो दाम में ये भेदभाव क्यों, क्यों एक देश और वैक्सीन के तीन अलग-अलग दाम तय किए गए हैं?

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार की वैक्सीन वितरण नीति को दिशाहीन बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की दिशाहीनता के चलते कई राज्य ग्लोबल टेंडर निकालने के लिए मजबूर हुए हैं, जबकि मॉडर्ना और फाइजर जैसी कम्पनियों ने राज्यों से सीधे सौदा करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने पूछा कि आखिर ऐसी नौबत क्यों आई कि राज्य सरकारों को ही ग्लोबल टेंडर निकालकर आपस में प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है?

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने एप आधारित वैक्सीन वितरण प्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत में 60% आबादी के पास इंटरनेट नहीं है। शहरी क्षेत्रों में भी लोगों को कोविन एप में रजिस्टर करके वैक्सीन के स्लॉट पाने में दिक्कत हो रही है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में और इंटरनेट से वंचित लोगों के लिए वैक्सीन के स्लॉट पाना तो बड़ा मुश्किल होगा। उन्होंने पूछा कि आखिर क्यों सरकार ने वैक्सीन वितरण नीति बनाते समय डिजिटल साक्षरता और इंटरनेट की कमी जैसे बिंदुओं को ध्यान में नहीं रखा?

Related Articles

Back to top button
E-Paper