शिक्षकों के मामले में विपक्ष ने सरकार को घेरा, सीएम ने सीएस को आयोग से बात करने का दिया निर्देश

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने के दौरान कोरोना संक्रमण की चपेट में आकर जान गंवाने वाले शिक्षकों का मामला गरमा गया है। गुरुवार को विपक्ष ने सरकार के रुख पर तीखे सवाल उठाए। पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मृत शिक्षकों के परिजनों से बात की और उन्हें पार्टी की तरफ से मदद का भरोसा दिलाया। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ‘उत्तर प्रदेश का समस्त शैक्षिक जगत भाजपा सरकार द्वारा मृतक शिक्षकों व शिक्षामित्रों के प्रति तिरस्कारपूर्ण रवैये से बेहद आक्रोशित है। भाजपा सरकार मृतकों की संख्या केवल ‘3’ बता रही है। भाजपा सरकार शिक्षक संघ की ‘1621’ मृतकों की सूची को मुआवज़े का मान न देकर मृतकों का अपमान कर रही है।’

दरअसल, बेसिक शिक्षा विभाग राज्य निर्वाचन आयोग की नियमावली के आधार पर चुनावी ड्यूटी के दौरान सिर्फ तीन शिक्षकों की मौत होने का दावा कर रहा है, जबकि शिक्षक ने 1621 शिक्षकों की सूची सौंपी है, जो चुनावी ड्यूटी के दौरान संक्रमित हुए और उनकी मौत हो गई। विभाग की ओर से मृत शिक्षकों की संख्या सिर्फ तीन बताने पर शिक्षक संगठनों ने भी तीखी नाराजगी जताई है।

सपा के अलावा कांग्रेस भी इस मामले को लगातार उठा रही है। गुरुवार को अल्पसंख्यक कांग्रेस ने सभी 1621 शिक्षकों और कर्मचारियों को एक करोड़ रुपये मुआवजा और परिवार के एक-एक सदस्य को नौकरी देने की मांग उठाई। अल्पसंख्यक कांग्रेस प्रदेश चेयरमैन शाहनवाज़ आलम ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के 11 मई के फैसले का हवाला दिया। इसमें जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और अजीत कुमार की खंडपीठ ने योगी सरकार को प्रत्येक मृतक शिक्षक के परिवार को एक-एक करोड़ रुपया मुआवजा देने का निर्देश दिया था। बुधवार को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी शिक्षकों का मामला उठाया था. उन्होंने सरकार पर आंकड़ों को छिपाने का आरोप भी लगाया था।

इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्य सचिव को चुनावी ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमण से जान गंवाने वाले शिक्षकों की मदद के मामले में राज्य चुनाव आयोग से संपर्क करने का निर्देश दिया है। दरअसल, चुनाव नियमावली की वजह से उन शिक्षकों को मुआवजा नहीं मिल पा रहा है, जिनकी मौत चुनावी ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमण होने से हुई है। इसके तहत किसी कर्मचारी के मतदान/मतगणना कार्य के लिए घर से निकलने और वापस घर पहुंचने तक के समय को ही चुनावी ड्यूटी में शामिल किया जाता है। इसलिए कोरोना संक्रमित शिक्षकों व दूसरे कर्मचारियों की मौत चुनावी ड्यूटी के दौरान होने वाली में शामिल नहीं हो पा रही है, क्योंकि ऐसी मौतें तय अवधि के बाद हुई हैं। इसीलिए अब सरकार चुनाव आयोग से चर्चा करके निर्वाचन नियमावली में बदलाव के जरिए समस्या का समाधान निकालने की कोशिश में जुटी है।

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