धान खरीद मेें धांधली, कागज पर चल रहे क्रय केंद्र, किसान परेशान

शाहजहांपुर। जिले में धान खरीद मेें बड़े पैमाने पर धांधली शुरू हो गई है। निगोही के सभी केंद्र तो कागज पर ही चल रहे हैैं। वहां न तराजू है और न ही बाट, सिर्फ बैनर ही लगा है। इनमें ज्यादातर पंजीकृत समितियों के केंद्र हैैं, जहां न खरीद हो रही है और न ही उनका कोई स्टॉफ होता है। बुधवार को पड़ताल में धान की खरीद में हो रहा खेल पकड़ में आया।

निगोही में एसएफसी, आरएफसी, पीसीएफ, एफसीआई, पीसीयू व ऑफ कन्ज्यूमर कोसो. जोगीपुर की पंजीकृत समितियों के दर्जन भर से अधिक धान क्रय केंद्र बनाए गए हैैं। एक अक्टूबर से धान की खरीद शुरू है।

क्रय केंद्रों पर धान की खरीद न होने से किसान हैरान-परेशान हैैं। वे रोज ही क्रय केंद्रों पर जाते हैैं, मगर वहां सिर्फ बैनर ही लगा देख लौट आते हैैं। मजबूरी में उन्हें कम दाम पर धान बेचना पड़ रहा है। दरअसल, धान बेचने के बाद ही किसान अगली फसल की बुवाई करेंगे।

इसी मजबूरी की समितियां फायदा उठा रही हैैं। बताते हैैं कि कागजों पर संचालित क्रय केंद्रों का पूरा सिंडिकेट है। सिर्फ केंद्र ही कागजों पर नहीं संचालित होते, बल्कि पूरा केंद्रों का व्यवसाय कागज पर हो जाता है। इसमें विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों से लेकर आढ़तियों और पंजीकृत समितियों के संचालक तक की मिलीभगत होती है।

क्रय केंद्र संचालक किसानों से धान नहीं खरीदते हैैं, जिसके कारण मजबूरी में किसान कम दाम पर धान बेच देते हैैं और क्रय केंद्र संचालक उसी धान को सरकारी दाम से कम रेट पर खरीदते हैैं। सरकार ने धान खरीद का रेट 1868 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया है। इसके अलावा 20 रुपये प्रति कुंतल छनाई-कटाई के लिए दिया जाता है। इस प्रकार से 1888 प्रति कुंतल धान का रेट सरकार से मिलता है।

क्रय केंद्रों पर खरीद न होने से किसान लगभग 1000 रुपये प्रति कुंतल के भाव से धान बेचने को मजबूर हैैं। इसी धान को क्रय केंद्र संचालक 1100 से 1200 रुपये प्रति कुंतल के रेट पर बिचौलियों से खरीद लेते हैैं और फिर सीधे राइस मिल पहुंचा देते हैैं। ऐसे में क्रय केंद्र संचालकों को लगभग सात सौ रुपये प्रति कुंतल का लाभ हो रहा है।

खास बात यह है कि सरकार क्रय केंद्र संचालकों को खरीदारी के लिए 27 रुपये प्रति कुंतल कमीशन भी देती है। सिंडीकेड में शामिल लोगों के पास सभी कागजात भी हैैं जिनसे वे आसानी से भुगतान करा लेते हैैं। ऐसे में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व सीधे खाते में पैसे के नियम सब धरे रह गए हैैं।

तिलहर एसडीएम वेद सिंह चौहान से जब धान क्रय केंद्रों के बारे में जानकारी करनी चाही तो उन्होंने जानकारी देने से ही मना कर दिया।

Related Articles

Back to top button
E-Paper