पेरेंटिंग का तरीका बच्चों पर बड़ा प्रभाव डालता है

बच्चों की बढ़ती उम्र के साथ-साथ पेरेंटिंग का तरीका उनके दिमाग पर एक पर छाप छोड़ता चला जाता है। आगे चल कर यही उनके व्यक्तित्व का एक हिस्सा बन जाता है। हर पेरेंट का अपने बच्चे को पालने का तरीका अलग होता है। पेरेंटिंग स्टाइल माता-पिता के बच्चे के प्रति व्यवहार और वह उसे किस तरह ट्रीट करते हैं, उसकी कैसी देखभाल करते हैं व उसे किस प्रकार की सीख और अनुशासन सिखाते हैं, इन सभी बातों पर निर्भर करता है।

आपका पेरेंटिंग का तरीका भले ही कोई भी हो लेकिन यह आपके बच्चे के विकास पर क्या प्रभाव डालता है यह अधिक महत्वपूर्ण होता है। हर पेरेंट्स को जीवन में अपने बच्चे को कई महत्वपूर्ण सीख देनी होती है तो कई बातें बच्चे समय के साथ खुद ही समझ जाते हैं।

1960 में मशहूर डेवलपमेंटल साइकोलॉजिस्ट डायना बॉमरिंड ने दुनिया को पेरेंटिंग स्टाइल और बच्चों के विकास के बीच एक गहरे संबंध के बारे में बताया। डायना ने लोगों को समझाया की किस तरह बच्चों पर पेरेंट्स के अलग-अलग बिहेवियर का असर पड़ता है। आगे चल कर ऐसी ही कई स्टडीज में भी पाया गया कि बच्चों के विकास पर माता-पिता के व्यक्तित्व का प्रभाव पड़ता है लेकिन इससे यह पूरी तरह से निर्धारित नहीं किया जा सकता कि बच्चा बड़ा हो कर किस तरह का इंसान बनेगा।

इन स्टडी के आधार निम्न कुछ ऐसे पेरेंटिंग स्टाइल हैं जिनका चाइल्ड डेवलपमेंट पर अधिक प्रभाव पड़ता है। इनकी मदद से आप जान पाएंगे कि किस तरह आपका व्यक्तित्व आपके बच्चे के विकास को इन्फ्लुएंस कर सकता है।

अथॉरिटेरियन टाइगर –

अथॉरिटेरियन सबसे लोकप्रिय पेरेंटिंग का तरीका माना जाता है। इसको अथॉरिटेरियन टाइगर भी कहा जाता है। अथॉरिटेरियन पेरेंटिंग स्टाइल का मतलब होता है स्ट्रिक्ट पेरेंटिंग। इस प्रकार के पेरेंट्स बच्चों से चाहते हैं कि वह बिना किसी सवालों के नियमों का पालन करें। अथॉरिटेरियन टाइगर स्टाइल वाले पेरेंट्स बच्चों को लाइफ में प्रॉब्लम साल्व नहीं करने देते हैं। इसके अलावा वह बच्चों से चाहते हैं कि उनके लिए जो गाइडलाइन बनाई गई हैं वह केवल उन्हीं का पालन करें।

अथॉरिटेटिव डॉलफिन –

अथॉरिटेटिव अथॉरिटेरियन टाइगर के बाद दूसरा सबसे अधिक लोकप्रिय पेरेंटिंग का तरीका होता है। चाइल्ड डेवलपमेंट के लिए इस स्टाइल को आमतौर पर अथॉरिटेटिव डॉलफिन पेरेंटिंग स्टाइल कहा जाता है। इस तरह के डॉलफिन पेरेंट्स बाहर से कठोर लेकिन अंदर से नरम होते हैं। अथॉरिटेटिव का अर्थ होता है आधिकारिक। इस तरह के माता-पिता बच्चों को ठोस नियमों के साथ थोड़ी छूट भी देते हैं।

परमीसिव कंगारू

परमीसिव का मतलब होता है दयालु और रिआयती। परमीसिव पेरेंट्स अपने बच्चों के प्रति बेहद दयालु होते हैं और उन्हें बेहद छूट देते हैं। यह पेरेंटिंग का तरीका फॉलो करने वाले माता-पिता अधिक नियम निर्धारित नहीं करते हैं। परमीसिव पेरेंटिंग स्टाइल वाले पेरेंट्स नरम होते हैं और केवल गंभीर स्थिति में ही आगे आते हैं। इस प्रकार के पेरेंट्स एक दोस्त की छवि बनाने पर अधिक जोर देते हैं और उनकी सभी समस्याओं के बारे में सुनते हैं। लेकिन यह अपने बच्चों के व्यवहार गलत और निर्णयों को लेकर अधिक ध्यान नहीं देते हैं।

नेग्लिजेंट पांडा –

नेग्लिजेंट पांडा पेरेंटिंग का मतलब होता है लापरवाह माता-पिता। इस प्रकार का पेरेंटिंग का तरीका सबसे अधिक हानिकारक होता है। इसमें पेरेंट्स अपने बच्चे को केवल पोषण और रहने के लिए जगह दे पाते हैं और कई मामलों में तो यह भी नहीं। नेग्लिजेंट पेरेंट्स इतने लापरवाह होते हैं कि उन्हें अपने बच्चे के भविष्य की कोई टेंशन नहीं होती।

Related Articles

Back to top button
E-Paper