चौथी बरसी पर बोले प्रमोद तिवारी – संगठित व वैधानिक लूट थी नोटबंदी

लखनऊ। वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने नोटबन्दी को देश की 125 करोड़ जनता की आकांक्षाओं, इच्छाओं और उनके भविष्य के साथ विश्वासघात करार दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस 08 नवम्बर के दिन देश की जनता की इच्छाओं और आकांक्षाओं के अनुरूप नोटबन्दी को लेकर ‘विश्वासघात दिवस’ मना रही है। यह विश्वासघात था पीएम मोदी और उनकी सरकार का भारत की जनता के साथ, अर्थव्यवस्था के साथ और भारत की सुरक्षा के साथ।

प्रमोद तिवारी रविवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से मुखातिब थे। उन्होंने कहा कि नोटबन्दी एक संगठित और वैधानिक लूट थी, जिससे देश की 125 करोड़ जनता की कमर टूट गयी। अर्थव्यवस्था चैपट हो गयी। एक झटके में की गयी नोटबन्दी से पीएम मोदी के कुछ पूंजीपति मित्रों और भाजपा को ही फायदा पहुंचा। पूर्व प्रधानमंत्री डा0 मनमोहन सिंह ने इसे वैधानिक लूट करार दिया था।

कांग्रेस नेता ने श्री मोदी के गोवा के मोपा एयरपोर्ट का शिलान्यास करते हुए दिये गये भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि पीएम मोदी ने देशवासियों से 50 दिन माँगा था उन्होंने कहा था कि बेनामी सम्पत्ति, भ्रष्टाचार, कालाधन, आतंकवाद और नक्सलवाद की पूर्ण समाप्ति के लिए नोटबन्दी अतिआवश्यक है। जनता को जो पीड़ा और कष्ट इस दौरान झेलना पड़ रहा है, सारी स्थिति इन 50 दिनों में सुधर जाएगी।

पीएम ने कहा था कि यदि मेरे अन्दर कोई कमी रह जाए, गलती निकल जाए, कोई मेरा गलत इरादा निकल जाए, यदि हालात न सुधरे तो आप जिस चैराहे पर खड़ा करेंगे, मैं खड़ा होकर देश की जनता की सजा स्वीकार करूंगा।

श्री तिवारी ने कहा कि आज कांग्रेस पार्टी मोदी जी को याद दिला रही है कि चार साल बीत गये हैं। देश की अर्थव्यवस्था रसातल में है, पीएम मोदी को देश की जनता से नोटबन्दी के लिए माफी मांगनी चाहिए।

प्रमोद तिवारी ने कहा कि श्री मोदी ने नोटबन्दी को जरूरी बताते हुए इसे आतंकवाद और नक्सलवाद के खात्मे के लिए बेहद जरूरी राष्ट्रहित का कदम बताया था, लेकिन ठीक इसके बाद पुलवामा की घटना होती है। नोटबन्दी के चार साल बीत जाने के बाद हमारे देश में सबसे ज्यादा शहादत आतंकवादी घटनाओं में हुई हैं।

श्री तिवारी ने कहा कि इस नोटबन्दी की वजह से ही आज देश 47 सालों में सर्वाधिक बेरोजगारी की स्थिति से गुजर रहा है। हमारी जीडीपी रसातल में पहुंच गयी है। नोटबन्दी के चलते हमारी जीडीपी -23.9प्रतिशत (माइनस 23.9 प्रतिशत) पर पहुंच गयी है।

देश जीडीपी के एतिहासिक गिरावट में पहुंच चुका है। मजदूरों का पलायन जो कोरोना काल में हुआ है उसकी सबसे बड़ी वजह नोटबन्दी ही है। नोटबन्दी से कई प्रदेशों की अर्थव्यवस्था टूट गयी और प्रवासी श्रमिकों को अत्यधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

कांग्रेस नेता ने कहा कि नोटबन्दी इससे पहले तानाशाह गद्दाफी, मुसोलनी और हिटलर ने की थी। नोटबन्दी का फैसला करके प्रधानमंत्री मोदी खुद को इस कतार में खड़ा कर लिया है।

श्री तिवारी ने कहा कि आतंकवाद, नक्सलवाद और बेतहाशा मंहगाई, बेरोजगारी अगर बढ़ी है तो इसी संगठित लूट की वजह से बढ़ी है। श्री तिवारी ने कहा कि अब मोदी जी आप खुद चैराहा चुनें, समय चुनें और देश की जनता से माफी मांगें।

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