प्रधानमंत्री ने संतों से किया आत्मनिर्भर भारत की पीठिका तैयार करने का आह्वान

जयपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संतों, महंतों और आचार्यों से आत्मनिर्भर भारत की पीठिका तैयार करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि संतों और महापुरुषों का विचार अमर होता है, क्योंकि वो जो बताते हैं, वही अपने जीवन में जीते हैं।

पीएम मोदी सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राजस्थान के पाली में शांति प्रतिमा (जैन भिक्षु आचार्य विजय वल्लभ सूरीश्वर जी महाराज) का अनावरण कर रहे थे।

पीएम मोदी ने कहा कि आज 21वीं सदी में मैं आचार्यों, संतों से एक आग्रह करना चाहता हूं कि जिस प्रकार आजादी के आंदोलन की पीठिका भक्ति आंदोलन से शुरू हुई। वैसे ही आत्मनिर्भर भारत की पीठिका तैयार करने का काम संतों, आचार्यों, महंतों का है।

जैन मुनि आचार्य विजय वल्लभ के विचारों को उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जैन मुनि कहते थे कि साधु, महात्माओं का कर्तव्य है कि वो अज्ञान, कलह, बेगारी, आलस, व्यसन और समाज के बुरे रीति रिवाजों को दूर करने के लिए प्रयत्न करें। उन्होंने कहा कि आचार्य जी का जीवन हर जीव के लिए दया, करुणा और प्रेम से ओत-प्रोत था।

पीएम मोदी ने कहा कि यह शांति प्रतिमा विश्व में शांति, अहिंसा और सेवा का प्रेरणा स्रोत बनेगी। भारत ने हमेशा पूरे विश्व को, मानवता को, शांति, अहिंसा और बंधुत्व का मार्ग दिखाया है। उन्होंने कहा कि आचार्य जी के शिक्षण संस्थानों ने शिक्ष और संस्कार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदानों का ऋणी है।

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