थालियों की टकराहट में उलझते सवाल

Mahesh Pandey

वरिष्ठ पत्रकार: महेश पाण्डे

विगत 14 जून को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। प्रारंभ में इसे आत्महत्या का नाम देकर ठंडे बस्ते में डाला जा रहा था। मुंबई पुलिस ने लगभग 3 महीने तक जांच का दिखावा किया लेकिन कुछ इलेक्ट्रानिक चैनलों ने इसे हत्या करार दिया और लगातार इस मामले को जिंदा रखा। मुंबई पुलिस की जांच को लटकाने के रैवये से परेशान सुशांत के पिता ने पटना में एफआईआर दर्ज कराई। पटना पुलिस जांच करने मुंबई गई, उसने मुंबई पुलिस के असहयोग के बावजूद सुशांत की मौत के मामले में कुछ तथ्य जुटाने का दावा किया।

जांच करने गए पटना के एसपी को सहयोग देने की जगह वहां उन्हें कोविड-19 के नाम पर हाथ में मुहर लगाकर क्वारंटाइन कर दिया। मीडिया और सुशांत के परिवार फैंस की ओर से सीबीआई जांच कराने की लगातार मांग की जाने लगी। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार से सीबीआई जांच की संस्तुति की जिसे केंद्र सरकार ने मान लिया। इस मामले में सुशांत की लिव-इन रिलेश्नशिप पार्टनर रिया चक्रवर्ती सीबीआई जांच रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट जा पहुंची लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जांच शुरू करने को हारी झंडी दे दी। सीबीआई के सीन में आते ही पूरी तस्वीर पलट गई जो मुंबई पुलिस मामले को भटकाने में लगी थी उसके हाथ के तोते उड़ गए।

मुंबई पुलिस की जांच प्रक्रिया में सुस्ती और टालू रवैये से यह साफ होता गया कि मामले के तार कहीं न कहीं सत्ता प्रतिष्ठान से जुड़े हैं। इसका खुलासा शिवसेना के सांसद संजय राउत के लगातार मुंबई पुलिस के पक्ष में बयानबाजी और उसे स्काटलैंड पुलिस की टक्कर का बताते रहे, कंगना रनौत का सुशांत के पक्ष में दिए बयानों और फिल्म इंडस्ट्री में ड्रग्स की घुसपैठ की जांच की बात कहना शिवसेना को रास नहीं आया और कंगना के खिलाफ बृहन मुम्बई नगर पालिका (बीएमसी) ने 24 घंटे का नाटिस देकर उसके आफिस में अतिक्रमण हटाने का आड़ में तोड़ फोड़ की, बाद में हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने पर रोक लगायी, बीएमसी में महाराष्ट्र सरकार के बड़े भाई शिवसेना का कब्जा है।

 

ऐसे में राजनीतिक प्रतिशोध को एंगल ढूढना कतई गलत नहीं है। कंगना के आफिस के बगल में फैशन डिजायनर मनीष मल्होत्रा का भी दपतर है जिसे छुआ तक नहीं। बीएमसी की कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने टिप्पड़ी की कि शहर अतिक्रमण की चपेट में है आपको कंगना का आफिस ही क्यों दिखा। कंगना और शिवसेना के बीच किस निचले स्तर तक पहुंच गयी थी कि कंगना ने ट्वीट किया ’उखाड़ सको तो उखाड़ लो बीएमसी की कार्रवाई के बाद सामना ने लिखा उखाड़ लिया।

जिस समय बीएमसी के बुल्डोजर गरज रहे थे, कंगना हवाई जहाज में मुम्बई आने के लिए बैठी थी।सरकार से राहत की कोई उम्मीद न देख कंगना ने बाद में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से पूरे मामले की शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई, धीरे-धीरे भाजपा इस पूरे प्रकरण में मुखर हो गई और मामला भाजपा और महाराष्ट्र सरकार की हो गई। सरकार में शामिल एनसीपी के सुप्रीमो ने पहले तो कार्रवाई पर सवाल खड़े किये लेकिन बाद में शरद पवार खुद को तटस्थ दिखाने लगे। इस पूरे प्रकरण में ध्यान देने वाली बात यह है कि महाराष्ट्र में गृहमंत्री का कार्यभार एनसीपी के अनिल देशमुख के पास है, शुरू-शुरू में तो सीबीआई सुशांत की मौत के मामले की जाँच करती रही, ज्यों-ज्यों जांच आगे बढ़ती गई इसमें ड्रग्स और मनी लाड्रिंग के मामले भी जुड़ते गये। अब सीबीआई, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और इन्फोर्समेण्ट डायरेक्ट्रेट भी अलग-अलग तरीके से जांच कर रहे हैं। सीबीआई अभी तक सुशांत के मामले की जांच कर ही रही थी कि 8 जून को दिशा साल्यान की मौत के मामले में भी पूछताछ करने लगी है।

दिशा पहले सुशांत के साथ काम कर चुकी थी, एक हफ्ते के भीतर दोनों की मौत होने से मामला काफी उलझ गया है। महाराष्ट्र के कद्दावर भाजपा नेता नारायण राजे के पुत्र नितेश राजे भाजपा विधायक की इस मामले में इंट्री से मामला और संदेहास्पद हो गया है। राजे का कहना है कि 8 जून की पार्टी में जाने से पहले दिशा ने तीन फोन किये थे 100 नम्बर पर भी पुलिस को सूचना दी लेकिन कोई जवाब नहीं दिया। दिशा के मंगेतर रोहन राय के फ्लैट पर हुई पार्टी में दिशा शामिल हुई और वहीं अपार्टमेंट में गिर जाने ध्क्का देने से असकी मौत हो गई। मुम्बई पुलिस ने इस मामले में चालू रवैया अपनाया और एक्सीडेंटल डेथ मानकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

Sushant Singh

नितेश राजे ने दिशा की मौत के मामले में 16 सितम्बर को गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर जांच कराये जाने तथा रोहन को पूरी सुरक्षा देने की मांग की है। दिशा की मौत का मामला इतना तूल पकड़ेगा इसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। सूत्रों के अनुसार सीबीआई ने अपरोक्ष रूप से इस मामले की जांच भी करना शुरू कर दिया है।

जहां चार बर्तन होते हैं तो वे टकराते ही हैं। मगर संसद में जब थालियां टकराने लगें तो बात बहुत गंभीर हो जाती है। सोमवार को संसद सत्र शुरू हुआ, शून्यकाल में भाजपा सांसद और भोजपुरी फिल्मों के सुपर स्टार रवि किशन ने कहा- ‘पाकिस्तान और चीन से मादक पदार्थों की तस्करी हो रही है, यह देश की युवा पीढ़ी को बर्बाद करने की साजिश है।

जया बच्चन के बयान पर कंगना रनौत ने ट्वीट कर पलटवार किया ‘जया जी अगर मेरी जगह आपकी बेटी श्वेता को किशोरावास्था में पीटा जाता, ड्रग सेवन कराया जाता और बदसलूकी की जाती तो तब भी आप यही कहतीं? अगर अभिषेक परेशान किए जाने और बुलिंग की शिकार होने की शिकायत करते हुए एक दिन फांसी के फंदे से झूलते पाए जाते क्या तब भी आप यही कहतीं?’ कंगना ने एक अन्य ट्वीट में कहा कि यह मानसिकता कि गरीब को रोटी मिल गई, बस यही काफी है, इसे बदला जाना चाहिए। फिर ट्वीट किया। जया जी आपने कौन सी थाली दी, यह मेरी अपनी थाली है।

जया के हमले के जवाब में रवि किशन ने भी कहा मैंने तो अपनी थाली खुद बनाई, उन्होंने कहा जया जी ने मेरे वक्तव्य को ठीक से नहीं समझा, मैंने पूरी फिल्म इंडस्ट्री पर आरोप नहीं लगाया, लेकिन जो मुट्ठी भर लोग हैं उन्हें ड्रग्स कौन दे रहा है? हमने जो सवाल उठाया वह भावी पीढ़ी के लिए है। मुझे बालीवुड में किसी ने काम नहीं दिया, मेरा कोई गॉडफादर नहीं है, अपनी थाली खुद बनाई है। मैं नहीं जानता कौन सी थाली कौन सा छेद, बालीवुड गंगा की तरह साफ है चंद मछलियां हैं जो इस तालाब को गंदा कर रही हैं।

जया बच्चन, कंगना रानौत और रवि किशन के बयानों ने फिल्म इंडस्ट्री को दो खेमों में बांट दिया, राज्यसभा में जया का बयान आते ही सोनम कपूर और फरहान अख्तर, प्रोड्यूसर गिल्ड आफ इंडिया, अनुभव सिन्हा, दूसरी ओर डायरेक्टर निखिल द्विवेदी सारा अली खान और कई लोग हैं। पूरे प्रकरण पर पूजा भट्ट कहती हैं ”ड्रग लेने वाले किस हालत में रहते हैं, यह हमें देखना चाहिए, ड्रग लेने वालों का पुनर्वास होना चाहिए। अभिनेत्री और सांसद हेमामालिनी कहती हैं, एक बार बॉलीवुड की सफाई होनी जरूरी है।

थालियों की यह टकराहट एनसीबी और प्रवर्तन निदेशालय की जांच के साथ और तेज होगी, यह तो तय है कि सुशांत और दिशा की संदिग्धावस्था में हुई मौत का सच जब सामने आयेगा तो मुम्बई पुलिस और महाराष्ट्र सरकार को जवाब देते नहीं बनेगा।

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