राजस्थान में ‘ब्लैक फंगस’ महामारी घोषित, देश भर में बढ़ी मामलों की संख्या

कोरोना संकट के बीच देश भर में ब्लैक फंगस के मामले बढ़ रहे हैं। इसके खतरे को देखते हुए राजस्थान ने ब्लैक फंगस को महामारी घोषित कर दिया है। राजस्थान महामारी अधिनियम-2020 के तहत इससे जुड़ा आदेश प्रमुख शासन सचिव अखिल अरोरा ने जारी किया है।

उत्तर प्रदेश में भी ब्लैक फंगस के मामले बढ़ रहे हैं। किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज में अब तक ब्लैक फंगस के 50 रोगी भर्ती हो चुके हैं, जिनमें से 9 रोगियों को पिछले 24 घंटों में भर्ती किया गया है। अब तक 6 रोगियों की सर्जरी हुई है, जबकि 4 रोगियों की मौत हो चुकी है। इस बीच एक रोगी स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं।

दिल्ली के एम्स में ब्लैक फंगस के रोजाना 20 नए मामले सामने आ रहे हैं। अब तक दिल्ली में ब्लैक फंगस कुल मामलों की संख्या 187 हो चुकी है। एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग के हेड प्रो. एमवी पद्म श्रीवास्तव ने कहा कि ब्लैक फंगस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, इसलिए मरीजों का इलाज करने के लिए एम्स ट्रामा सेंटर और एम्स झज्जर में अलग से म्यूकर वार्ड बनाए हैं।

ब्लैक फंगस से महाराष्ट्र सबसे ज्यादा प्रभावित है। यहां पर बुधवार को 90 मामले सामने आए। इसके साथ कुल मरीजों की संख्या 1500 हो गई है। हालांकि, ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों के बीच दवाओं की कालाबाजारी करने वाले एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। कई जगहों पर एंटीफंगल दवाओं और इंजेक्शन की किल्लत होने की बात सामने आई है।

म्यूकोर माइकोसिस एक तरह का फंगस संक्रमण है, जो डायबिटीज व अन्य बीमारी से ग्रस्त लोगों को शिकार बनाता है। लेकिन इस समय कोरोना संक्रमित मरीजों में स्वस्थ होने के बाद इसका संक्रमण देखा जा रहा है। इसकी वजह इलाज में स्टेराइड का इस्तेमाल है। स्टेरॉयड के अलावा कोरोना की कुछ दवाएं भी मरीज की प्रतिरक्षा प्रणाली पर असर डालती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, ब्लैक फंगस के कारण सिर दर्द, बुखार, आंखों में दर्द, नाक बंद या साइनस के अलावा देखने की क्षमता पर भी असर पड़ता है और मस्तिष्क तक पहुंचने पर रोगियों की मौत भी हो जाती है।

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