महाशिवरात्रि पर पहला शाही स्नान को लेकर साधु-संतों में उत्साह, जानें सब कुछ

महाशिवरात्रि पर्व पर कुंभ का पहला शाही स्नान होने जा रहा है। विशेष नक्षत्रों में पड़ रहे इस महाशिवरात्रि के पर्व का विशेष महत्व है। इस समय कुंभ चल रहा है और ऐसा माना जाता है कि समुद्र मंथन के बाद जिन 12 जगहों पर अमृत की बूंदें गिरी थी उनमें से एक हरिद्वार भी है। जहां हर 12 साल में कुंभ का आयोजन किया जाता है।

महाशिवरात्रि के शाही स्नान को लेकर संन्यासियों, अखाड़ों के साथ मेला प्रशासन और जिला प्रशासन की बैठक हो चुकी हैं। अखाड़ों के स्नानों का समय तय हो चुका है। कुंभ पर्व पर संत शाही स्नान को बड़ी शान और शौकत के साथ जाते हैं। शाही स्नान पर संतों का कहना है कि राजा-महाराजाओं के समय राज्य का शासक संत -महात्माओं का स्वागत बड़ी शान और शौकत के साथ करता था। कुंभ के दौरान राजा-महाराजा, साधु-संतों को बड़ी राजशाही ठाट-बाट के साथ स्नान के लिए ले जाया करते थे। तभी से यह प्रथा चली आ रही है।

प्रमुख स्नानों को शाही स्नान कहा जाता है, जिसमें प्रमुखता से संत स्नान करते हैं। इसको लेकर संतों में खासा उत्साह है। बुधवार को शिवरात्रि के शाही स्नान में संन्यासियों के सात अखाड़े ही स्नान करेंगे। बैरागी, उदासीन व निर्मल अखाड़ों के संत इसमें शामिल नहीं होंगे। 

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