भूल जाना हमेशा की अठखेलियाँ

sangam lal

डॉ. संगमलाल त्रिपाठी भँवर

वक्त मेरे लिए तुम न बर्वाद करना
मुझे भूल जाना न अब याद करना ,
संग रहकर टहलते थे हरदम प्रिये
अब अतीतों की न तुम कभी बात करना  ।

ज़िन्दगी का सफ़ीना पुराना हुआ
अब तलक साथ तेरा निभाना हुआ
न बुलाना मुझे न ही पछताना तुम
तेरी यादें ज़ेहन से भुलाना हुआ  ।

चाहता कौन है स्वप्न टूटे किसी का
राह भी वो पुरानी न छूटे किसी का
मौन रह करके दीपक जलाती रहो
दिल में रखना नहीं याद भी अब किसी का  ।

वो पुरानी जो यादें हैं तुम भूल जाओ,
चले राह जो हम उसे भूल जाओ,
किसतरह जी रहा सोचना न कभी भी
तल्ख़ बातें हुई जो उसे भूल जाओ  ।

भूल जाना हमेशा की अठखेलियाँ,
मुझसे रखना बचा करके अब दूरियाँ,
कुछ न सोचो पुरानी वो बातें”भँवर”
न होगा मिलन समझो मजबूरियाँ  ।।

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