सुप्रीम कोर्ट ने पीएम केयर्स फंड के तहत बेसहारा बच्चों के लिए घोषित योजना पर केंद्र से जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना के चलते माता-पिता दोनों या किसी एक को खोने वाले बच्चों के लिए पीएम केयर्स फंड की तरफ से घोषित योजना का ब्यौरा मांगा है। अदालत ने इससे जुड़ी सुनवाई को 7 जून तक के लिए टाल दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते राज्यों से कोरोना की दूसरी लहर में सहारा खोने वाले बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी लेने के लिए कहा था।

दरअसल, इस मामले में 28 मई को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने सभी राज्यों से पिछले साल मार्च से लेकर अब तक कोरोना संक्रमण की वजह से अनाथ हुए बच्चों की संख्या की जानकारी मांगी थी। सभी राज्यों को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के वेब पोर्टल ‘बाल स्वराज’ में सारी जानकारी अपडेट करने के लिए कहा गय था। इस बारे में सुप्रीम कोर्ट में पेश हलफनामे के मुताबिक, 29 मई की शाम तक 25 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों ने जानकारी डाली, जिसके मुताबिक कोरोना संक्रमण की वजह ससे कुल 1,742 बच्चों ने अपने माता-पिता दोनों को खोया है। वहीं, माता या पिता दोनों में से किसी एक को खोने वाले बच्चों की संख्या 7464 है। इसके अलावा 140 बच्चे ऐसे हैं जिन्हें उनके परिवार ने छोड़ दिया है।

मंगलवार को अदालत में सुनवाई के दौरान ऐसे बच्चों की देखभाल के साथ आर्थिक सहायता की जरूरत का सवाल उठा। इस पर जस्टिस एल नागेश्वर राव और अनिरुद्ध बोस ने केंद्र सरकार को पीएम केयर्स फंड के तहत बच्चों के लिए घोषित योजना पर हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया।

रविवार को घोषित ‘पीएम-केयर्स फॉर चिल्ड्रन’ योजना के तहत 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले प्रत्येक बच्चे के लिए 10 लाख रुपये का एक कोष बनाया जाएगा. इसके जरिए 18 वर्ष की उम्र होने से अगले पांच साल तक उसकी उच्च शिक्षा और व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने के लिए मासिक सहायता दी जाएगी और 23 वर्ष की आयु पूरी करने पर उसे एकमुश्त राशि दे दी जाएगी।

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