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Sharad Purnima 2021 : कब है शरद पूर्णिमा? यहां जानिए शुभ मुहूर्त और कहानी

शरद पूर्णिमा 2021 का पर्व 19 व 20 अक्टूबर को मनाया (Sharad Purnima 2021) जाएगा। सनातन धर्म में शरद पूर्णिमा खासा महत्व है। शरद पूर्णिमा के दिन देवी लक्ष्मी की विशेष पूजा अर्चना की जाती है।

Sharad Purnima 2021

Sharad Purnima 2021

इसके अलावा भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में धन की कमी दूर होती है। शरद पूर्णिमा कई मायनों में खास है। इतिहास पर नजर डालें तो इस दिन कई बड़ी घटनाएं घटीं, इस कारण से भी शरद पूर्णिमा का खासा महत्व माना जाता है।

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Sharad Purnima 2021 Shubh Muhurat

शरद पूर्णिमा को मनाए जाने को लेकर ज्योतिषाचार्य पं. देवेन्द्र शुक्ल शास्त्री के मुताबिक शरद पूर्णिमा इस वर्ष 19 अक्टूबर को मनाई जाएगी। हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को ही शरद पूर्णिमा कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन आकाश से अमृत की बूंदों की वर्षा होती है। इस बार पंचांग भेद की वजह से कुछ जगहों पर 20 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima 2021 Shubh Muhurat) मनाई जाएगी। शरद पूर्णिमा 2021 तिथि 19 अक्टूबर शाम 7 बजे से आरम्भ होगी तथा 20 अक्टूबर रात्रि 8 बजकर 20 मिनट पर यह समाप्त होगी। इस कारण से 19 अक्टूबर को ही शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा।

History And Story

उन्होंने बताया कि पौराणिक मान्यता (Sharad Purnima 2021 History And Story) है कि भगवान कृष्ण ने शरद पूर्णिमा पर ही महारास की रचना की थी। इस दिन चंद्र देवता की विशेष पूजा की जाती है और खीर का भोग लगाया जाता है। रात में आसमान के नीचे खीर रखी जाती है। ऐसा माना जाता है कि अमृत वर्षा से खीर भी अमृत के समान हो जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी की समुद्र मंथन से उत्पत्ति भी शरद पूर्णिमा के दिन ही हुई थी। इस तिथि को धन-दायक भी माना जाता है।

मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी धरती पर विचरण करती हैं और जो लोग रात्रि में जागकर मां लक्ष्मी का पूजन करते हैं, वे उस पर कृपा बरसाती हैं और धन-वैभव प्रदान करती हैं। इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ होता है और पृथ्वी पर चारों तरफ चंद्रमा की उजियारी फैली होती है। धरती दूधिया रोशनी में चांद के प्रकाश से नहा जाती है।

उन्होंने बताया कि शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा, कोजागर व्रत और कौमुदी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। कोजागर व्रत में मां लक्ष्मी की पूजा होती है। यह त्योहार बंगाली समुदाय के लोग मनाते हैं। माना जाता है कि इस रात देवी लक्ष्मी धरती पर विचरण करती हैं। जबकि कौमुदी व्रत भगवान कृष्ण को समर्पित होता है।

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