शारदीय नवरात्रि 2021 : पांचवे दिन की जाती है स्कंदमाता की उपासना, जानिये नियम…

देशभर में शारदीय नवरात्रि 2021 के पावन पर्व की धूम मची रहती है। इस पावन त्योहार के कारण ही सभी बाजारों में काफी चहल पहल सी देखने को मिलती है। नवरात्रि में मां के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। इस पर्व में भक्तगढ़ बड़े ही विधी-विधान के साथ नौ देवा माता रानी की पूजा करते है। आपको बता दे पांचवे दिन स्कंद माता रानी की पूजा की जाती है। स्कंदमाता को किस कलर का फूल और वस्त्र पहनाये जाते है ये सभी बातों को भक्तगढ़ जानने के लिये काफी ललायित रहते है।

शारदीय नवरात्रि 2021

हिंदू धर्म में नवरात्रि के पर्व को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पर्व के आते ही सब जगह मां के जगराते और भजन-कीर्तन होना शुरू हो जाता है, बहुते से ऐसे लोग है जो इन दिनों में अपने-अपने घरों में माता रानी की चौकी बैठाते है, जहां पूजा-पाठ कर भजन कीर्तन करते है। माता के दर्शनों के लिये सभी भक्त दूर दूर तक दर्शन करने तक जाते है। और कुछ लोग तो माता रानी के नाम से भंडारे तक कराते है। इन दिनों में हर जगह खुशहाली ही छाई रहती है।   

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कैसे की जाती है स्कंदमाता की पूजा

शारदीय नवरात्रि 2021 के पांचवे दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है। स्कंदमाता को श्वेत रंग के वस्त्रों को पहनाया जाता है, औऱ उनकी आरती घी से की जाती है। वहीं भक्तों को स्कंदमाता को धूप-दीप भी दिखाना चाहिए।  

माता के हवन का जाने क्या है विधान

स्कंदमाता की आरती के बाद हवन किया जाता है, वैसे तो सभी नौ देवी माता रानी की पूजा-अर्चना करने के बाद से आखिरी में हवन किया जाता है। इसका ये मतलब होता है कि पूजा में जो भूल-चूक हुई है, उसे माता रानी क्षमा करे। और पुराणों में ऐसा भी माना जाता है कि हवन माता रानी का भोग भी होता है। यही कारण है कि पूजा के बाद से सभी लोग हवन की प्रक्रिया को पूरा करते है।   

स्कंद माता को लगाये ये भोग

नवरात्रि मे सभी भक्त माता रानी की पूजा बड़े ही धूम-धाम से करते है। और स्कंद माता को केले का भोग लगाए जिसके बाद से उसे प्रसाद के रूप में बांट दे। ताकि माता का प्रसाद सभी को प्राप्त हो सके।

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