बम के ऊपर बैठा बंगाल

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राज्य ब्यूरो प्रमुख – तारकेश्वर मिश्र

क्या सचमुच पश्चिम बंगाल राज्य में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि राज्यपाल को ये कहना पड़ रहा है कि बम के ऊपर बैठा है बंगाल। मुर्शिदाबाद जिले से अंतर्राष्ट्रीय संगठन अलकायदा से जुड़े आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद जिस प्रकार के तथ्य सामने आ रहे हैं, उससे तो यही साबित हो रहा है कि सचमुच पश्चिम बंगाल बम के ऊपर बैठा है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी की छापेमारी में गिरफ्तार 6 लोगों से पूछताछ से राज्य में बड़े पैमाने पर आतंकी वारदातों की तैयारी का खुलासा हुआ है।

साथ ही यह भी पता चला है कि राज्य के लगभग 60 मदरसों और कुछ अन्य संगठनों के माध्यम से भारत में आतंकी कार्रवाई करने के लिए बड़े पैमाने पर युवाओं की भर्ती की जा चुकी है और अब भी ये प्रक्रिया चल रही थी। देश के कई इलाकों में दहशत फैलाने के उद्देश्य से पटाखों की आड़ में आईईडी युक्त शक्तिशाली बम बनाये जा रहे थे। छापेमारी में बरामद लैपटॉप और मोबाइल फोन से मिली जानकारियों के अनुसार इस तरह की गतिविधियों से जुड़े आतंकियों का नेटवर्क कश्मीर से लेकर केरल तक देश के कई राज्यों में फैल चुका है।

एनआईए के एक अधिकारी के अनुसार इस नेटवर्क के सूत्रों से भारत में विदेशी मदद से तैयार हुए आतंकी संगठनों के लगभग 64 मोड्यूल का पता चला है। इस जाल को तोडऩा और सभी सक्रिय लोगों को पकड़ पाना सबसे बड़ी चुनौती है। इन दहशतगर्द लोगों के पीछे जो लोग या संगठन बताये जा रहे हैं, उनका उद्देश्य भारत में अस्थिरता फैलाना है। ऐसे गैरकानूनी और जेहादी संगठनों से युवाओं को जोडऩे के लिए धार्मिक भावना का सहारा लिया गया है। पकड़े गए लोगों के बारे में उनके गांव और इलाके के लोगों को कभी भी ऐसा संदेह नहीं हुआ।

पश्चिम बंगाल

गांव के लोगों को केवल इतना पता था कि ये लोग केरल या देश के किसी अन्य इलाकों में काम के सिलसिले में जाते हैं और मदरसों के लिए मदद के रूप में कुछ पैसे भी लाते हैं। गिरफ्तार लोगों के घरों के भीतर तहखाना मिलना भी इलाके के लोगों के लिए आश्चर्यजनक था। अभी तक पकड़े गये कुल 9 लोगों के व्हाट्स एप ग्रुप में भेजे गये संदेशों को डिकोड करने से पता चलता है कि इनका प्रथम एजेंडा वर्तमान केन्द्र सरकार और खासकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपदस्थ करने का और दूसरा एजेंडा इस्लामिक स्टेट की स्थापना से जुड़ा है। इन दोनों एजेंडों पर काम कर रहे लोगों को विदेशी मदद केरल, दिल्ली, कश्मीर और भारत के कुछ पड़ोसी देशों से होकर भेजी जा रही है।

यह भी पता चला है कि यही नेटवर्क भारत में नकली नोट चलाने और मादक पदार्थों की तस्करी से भी जुड़ा हुआ है। इस नेटवर्क से जुड़े लोगों के संदेश भेजने और प्राप्त करने के लिए डार्क नेट विन्डो के प्रयोग को देखकर जांच अधिकारी भी हैरान हैं, क्योंकि इस काम में साइबर मामलों के विशेषज्ञ ही सफल हो पाते हैं, जबकि पकड़े गये लोगों को देखकर कोई ऐसा विश्वास भी नहीं कर सकता है। उनको जानने वाले पड़ोसी भी इस खुलासे से सन्न रह गये हैं।

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पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने आतंकी संगठन अलकायदा से जुड़े आतंकियों की गिरफ्तारी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल विनाशकारी बम के ऊपर बैठा हुआ है और राज्य प्रशासन शुतुरमुर्ग बना हुआ है। इस मामले में शुतुरमुर्ग की उपमा राज्य की सत्ताधारी पार्टी को नागवार गुजरी है।

वास्तव में शुतुरमुर्ग अपने पास आ रहे खतरे को देखने के बाद, बालू या मिट्टी में अपना सिर छिपा लेता है और समझता है कि खतरा टल गया। राज्यपाल के बयान से तिलमिलाए राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने इस बयान के लिए राज्यपाल की जमकर आलोचना की, लेकिन मुख्य सवाल अब भी कायम है। खतरा आंख बंद कर लेने से नहीं टल सकता है। राज्यपाल की चिंता भी जायज हैं क्योंकि राज्य में हिंसात्मक घटनाएं दिन-ब-दिन इतनी बढ़ती जा रही हैं कि उन पर नजर रख पाना तक मुश्किल हो गया है।

राज्य के विपक्षी दलों का आरोप है कि राज्य पुलिस का अत्यधिक राजनीतिकरण होने के कारण राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से जुड़े गंभीर मामलों में भी कार्रवाई नहीं होती है। भारत-बांग्लादेश की सीमा पर केन्द्रीय सुरक्षा बल के लोग घुसपैठियों, तस्करों और अन्य अपराधियों को अपनी जान की बाजी लगाकर पकड़ते हैं, लेकिन स्थानीय पुलिस प्रशासन से केन्द्रीय बलों को पर्याप्त सहयोग नहीं मिलता है।

एनआईए के मुताबिक राज्य में 58 मॉड्यूल सक्रिय हैं। बांग्लादेश के कुछ आतंकी संगठनों ने भी पश्चिम बंगाल में छद्म नामों से रास्ता तलाश लिया है, जिनका नाम है, हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी बांग्लादेश (हूजी-बी), जग्रता मुस्लिम जनता बांग्लादेश (जेएमजेबी), जमातुल मुजाहिद्दीन बांग्लादेश (जेएमबी), पूर्बा बांग्ला कम्युनिस्ट पार्टी (पीबीसीपी) और इस्लामी छात्र शिंबूर (आईसीएस)।

पश्चिम बंगाल में सक्रिय जिहादी संगठनों का उद्देश्य अल-कायदा और आईएसआईएस जैसे आतंकी संगठनों को सुरक्षित माहौल और जनशक्ति, संसाधन प्रदान करना है। पिछले साल दिल्ली दंगों से पहले कोलकाता सहित राज्य के अधिकांश जिलों में नुक्कड़ सभाओं के माध्यम से मुस्लिम समाज के युवा वर्ग को बरगलाने और भड़काने की खूब कोशिश की गयी। महीनों चले इन आयोजनों को शाहीनबाग से जोड़कर प्रचारित किया गया। इन आयोजनों पर लाखों रुपये खर्च भी हुए।

ये पैसे जिनके माध्यम से बंगाल में पहुंचे, वे सभी इसी 58 मॉड्यूल आतंकी में से किसी एक से जुड़े पाए गये हैं। चूंकि अभी जांच जारी है और साथ ही यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है, तो जांच अधिकारी भी इसे विस्तार से बताने से परहेज कर रहे हैं।

पिछले साल मशहूर अमेरिकी पत्रकार जेनेट लेवी ने अपने एक लेख में ठीक इसी प्रकार की चेतावनी दी थी। इस बहुचर्चित रिपोर्ट में आईसिस के एक सूत्र के हवाले से कहा गया था कि पश्चिम बंगाल जल्द ही एक इस्लामिक देश बन जाएगा! जेनेट लेवी ने दावा किया कि कश्मीर के बाद पश्चिम बंगाल में अब गृहयुद्ध होगा और अलग देश की मांग की जाएगी। जेनेट लेवी ने इसके लिए कई तथ्य पेश किए और इसके लिए मुख्य रूप से बंगाल में बिगड़ते जनसांख्यिकीय संतुलन को जिम्मेदार ठहराया।

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