जब तक दलित समाज को इंसाफ नहीं मिलेगा तब तक चलेगा आंदोलन: अनिल यादव

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि आज़मगढ़ के थाना रौनापार के पलिया गांव में 29 जून की रात स्थानीय पुलिस ने दलित परिवारों पर बर्बर अत्याचार किया है, चार मकानों को ध्वस्त करने के अलावा पुलिस ने महिलाओं के साथ मारपीट भी की है। इस मामले को लेकर कांग्रेस पार्टी लगातार आन्दोलन कर रही है।

पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए चल रहे धरने को संबोधित करते हुए प्रदेश उपाध्यक्ष विश्वविजय सिंह ने कहा कि पूरे प्रदेश में दलित उत्पीड़न अपने चरम पर है, योगी आदित्यनाथ की सरकार में दलितों के खिलाफ लगातार हमले बढ़े हैं,विशेषकर आज़मगढ़ में तो दर्जनों घटनाएं सामने आई हैं।

प्रशासनिक अधिकारियों से वार्तालाप के बाद प्रदेश संगठन सचिव अनिल यादव ने कहा कि हम एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे, दलित विरोधी प्रशासन का मनोबल हम चूर करके ही दम लेंगे। उन्होंने कहा कि इस सरकार में ऊपर से लेकर नीचे तक दलित विरोधी लोग बैठे हुए हैं, जब तक दोषियों के खिलाफ कार्रवाही नहीं होगी, यह आंदोलन जारी रहेगा। अनिल यादव ने साफ किया कि आश्वासन से आंदोलन को खत्म नहीं किया जाएगा, यह स्वाभिमान की लड़ाई है, जिसे मजबूती से लड़ा जाएगा।

धरने को संबोधित करते हुए दलित कांग्रेस के चेयरमैन आलोक प्रसाद ने कहा कि दलितों की लड़ाई पूरी दमदारी से कांग्रेस पार्टी लड़ रही है, हाथरस से लेकर पलिया तक तमाम मामलों में कांग्रेस पार्टी पहली कतार में खड़ी है। वहीं, जिला अध्यक्ष प्रवीण सिंह कहा कि आज़मगढ़ में योगी आदित्यनाथ के प्रशासन का रवैया दलित विरोधी रहा है, कानून का कोई मतलब नहीं है, पुलिस आम लोगों पर अत्याचार और दमन करने की आदी हो चुकी है।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी इस मामले को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार पर सवाल उठा चुकी हैं। सोमवार को उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ‘आज़मगढ़, रौनापार के पलिया गांव में यूपी पुलिस द्वारा दलित परिवारों पर हमला करने की खबर आ रही है। वहाँ कई मकानों को तोड़ा गया, सैकड़ों पर मुकदमा दर्ज किया। यह सरकारी अमले की दलित विरोधी मानसिकता का परिचायक है। तत्काल दोषियों के ऊपर कार्यवाही हो और पीड़ितों को मुआवजा दिया जाए।’

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