क्या कैराना होकर गुजरेगा योगी का विजयरथ?

सियासत का रण भले ही 2022  में होगा पर सत्ता की किलेबंदी अभी से शुरू हो गयी है. यूपी विधानसभा चुनाव की अभी कोई अधिकारिक घोषणा भले न हुई हो लेकिन राजनीतिक दल अपने अपने हथियारों के साथ चुनावी दंगल में हे ही कूद चुके हैं. जातिवाद,साम्प्रदायिकता,परिवारवाद,राममंदिर के इर्द गिर्द सियासी बिसात बिछी हुई है. इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैराना में पलायन पीड़ित हिन्दू परिवारों से मिलकर कर दी.योगी का संदेश साफ़ था कि वे हिंदुत्व के मुद्दे पर मुखर होकर लड़ेंगे .

कैराना

प्रदेश के 14 करोड़ वोटर इस बार अपनी सरकार चुनेंगे. लेकिन लाख से भी कम की जनसंख्या वाले कैराना का महत्व बढ़ गया है. दरअसल 2016 कैराना में हिन्दू पलायन का मुद्दा जोरशोर से उठा था. बीजेपी ने इस मुद्ददे को चुनावी मुद्दा भी बनाया था ,जिसके बाद पूरे प्रदेश में बीजेपी ने क्लीन स्वीप किया.

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दरअसल 2013 में मुज्ज़फरनगर दंगे हुए. जिसकी आग सालों तक उठती रही,लोकसभा 2014 में बीजेपी की प्रचंड बहुमत की केंद्र में सरकार बनी. जिसके बाद कैराना में हिन्दू पलायन के मामले ने तूल पकड़ा जिसमे तमाम सियासी पार्टियां कूद पड़ी. इस मुद्दे को भारतीय जनता पार्टी ने लगातार हवा दी, और विधानसभा चुनाव 2017 में भी बीजेपी को बड़ी कामयाबी मिली. उस वक्त कैराना की गलियों में दीवारों व दरवाजों पर “ये घर बीकाऊ है” लिखी तख्तियां लगी तस्वीरें उभरक्र आने लगी. जिसके बाद तमाम मीडिया कवरेज व ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर राजनीतिक दल वह पहुँचने लगे. पिछले विधानसभा चुनाव में कैराना हिन्दू पलायन का मुद्दा प्रमुख रूप से उठाया गया था.

आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी बहुत सक्रीय दिख रही है. ऐसे में पार्टी ने बैठक से लेकर रैली और दौरे शुरू कर दिए है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ ने कैराना पहुंचकर उन हिन्दू परिवारों से मुलाकात की जो वहां से पलायन कर गये थे.योगी ने उन परिवारों को भरोसा दिलाया कि अब उन्हें डरने की ज़रूरत नही है. योगी ने वादा किया किया पलायन का दंश झेलने वालों मुआवजा दिया जायेगा. पलायन पीड़ित हिन्दू अब आराम से अपने घरों में रहेंगे.अब किसी को डरने की ज़रूरत नही है.

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