दिल्ली पर मंडराया सबसे बड़ा खतरा, दो दिन बाद पूरी तरह गुल हो सकती है बिजली

कोरोना महामारी से निपटने के बाद अब भारत के सामने एक नया संकट सामने आकर खड़ा हो गया है. यह संकट है भारत में कोयले की कमी. जी हां, कोयला जिसे हम काला सोना कहते आये हैं आज भारत के लिए बेहद मुश्किल समस्या बनाकर सामने आ रहा है. इसी संकट के चलते देश की राजधानी दिल्ली पर बिजली ब्लैक आउट के खतरे के बादल मंडरा रहे हैं. जानकारी के मुताबिक, दिल्ली पर बड़ा खतरा आ गया है. दिल्ली में बिजली पॉवर प्लांट्स के पास अब सिर्फ़ दो दिन का ही कोयला बचा हुआ है.

दिल्ली पर बड़ा खतरा

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आखिर क्यों है कोयला इतना महत्वपूर्ण

हमारे देश की 70 प्रतिशत बिजली का उत्पादन करने वाले प्लांट कोयले पर ही संचालित होते हैं. पूरे देश की बात करें तो करीब 135 बिजली पॉवर प्लांट कोयले से चलते हैं. हमारे देश के ज्यादातर सेक्टर बिजली को ऑक्सीजन कि तरह इस्तेमाल करते हैं. कारोबार से लेकर घर बार तक हमें बिजली की जरुरत है. ऐसे में अगर देश में कोयला संकट आता है तो पूरा देश एक बड़ी समस्या का सामना करेगा. दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येन्द्र जैन ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि दिल्ली में जितने भी पॉवर प्लांट बिजली सप्लाई करते हैं, अब उन सबके पास सिर्फ़ एक दिन भर का ही कोयला बचा हुआ है.

केंद्र सरकार से लगाई मदद की गुहार

मंत्री सत्येन्द्र जैन ने केंद्र सरकार से मदद कि गुहार लगते हुए कहा कि सरकार जल्द से जल्द रेलवे वैगन कि व्यवस्था करे और जिन प्लांटों पर कोयले की भरी कमी है उन प्लांटों तक तुरंत कोयला भिजवाया जाए. अगर ऐसा नही हुआ तो हमारी अर्थव्यवस्था और समूचा जीवन अस्त-व्यस्त हो जायेगा.

इस क्राइसिस में भी छिपी है राजनीति

मंत्री सत्येन्द्र जैन ने आगे दिल्ली पर बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि इस क्राइसिस से केंद्र सरकार भली-भांति परिचित है. केंद्र सरकार की यह कारस्तानी भी ऑक्सीजन की कमी जैसी ही जान पड़ती है. यह कमी भी मैनमेड ही है. बेहद हैरानी की बात है कि हम दुनिया में कोयला प्रोडक्शन की लिस्ट में चौथे स्थान पर हैं और हम अपने ही देश में कोयला की आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं. जबकि देखा जाये तो हमारे देश में जितनी खपत है उससे चार गुना ज्यादा कोयला हम प्रोडूस करते हैं.

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