यूपी में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत बदतर: पीएल पुनिया

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पार्टी में चुनाव प्रचार समिति के चेयरमैन पीएल पुनिया ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर में हुयी तमाम मौतों के बावजूद उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की खस्ता हालत में कोई सुधार नहीं हुआ है।
पुनिया ने मंगलवार को कहा कि बीते साल ही कोरोना की दूसरी लहर में प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था ध्वस्त हो गई थी। अस्पतालों में बेड के लिए मारामारी, ऑक्सीजन की कमी से हो रही मौतों और गंगा किनारे दबाई गई और तैरती लाशों का खौफनाक मंजर अभी भी प्रदेश के लोगों की जेहन में ताजा है। उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट तक ने कहा कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था राम भरोसे चल रही है। स्वास्थ्य व्यवस्था के हर मोर्चे पर योगी सरकार नाकाम रही है।
उन्होने कहा कि दूसरी लहर से मची तबाही के बावजूद भी योगी सरकार ने कोई तैयारी नहीं की। रिपोर्ट्स बताती हैं कि उत्तर प्रदेश में पीएम केयर्स फंड से मिले 230 से अधिक वेंटिलेटर का डिब्बा तक नहीं खोला गया है। विज्ञापनों, पोस्टरों के जरिये अपना भ्रष्टाचार छुपाने वाली योगी सरकार ने आधे अधूरे बने कुछ जीनोम सिक्वेंसिंग लैब का उद्घाटन प्रधानमंत्री के हाथों करवा दिया, पर सच यह है कि यह सब शोपीस बनकर रह गए हैं।
कांग्रेसी नेता ने कहा अभी कुछ ही दिन बीते हैं जब नीति आयोग की एक रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को निचला स्थान मिला। उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में देश में सबसे फिसड्डी साबित हुआ है। डॉक्टरों की कमी के चलते प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था गर्त में जा चुकी है और प्रदेश में एक डॉक्टर पर साढ़े तीन हजार से अधिक मरीजों को देखने की जिम्मेदारी है।
पुनिया ने कहा कि मेडिकल कॉलेज के नाम पर भी इस सरकार ने सिर्फ धोखेबाजी की है। जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज में परिवर्तित तो कर दिया है लेकिन यह काम सिर्फ कागजी तौर पर हुआ। हालात यह हैं कि प्रदेश के अस्पतालों में न तो डॉक्टरों की पर्याप्त संख्या मौजूद है और न ही दवाओं के साथ लोगों को अन्य सुविधाएं मिल पा रही हैं।

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