सिद्धिविनायक मंदिर से जुड़ा यह अनोखा रहस्य जान कांप जाएगी आपकी रुह!

मुंबई शहर का सिद्धिविनायक मंदिर भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी गणपति बप्पा के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक जाना जाता है। सिद्घिविनायक, गणेश जी का सबसे लोकप्रिय रूप है। गणपति बप्पा के दर्शन के लिए वहां भारी संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु और सैलानी आते दर्शन के लिए आते रहते हैं। बप्पा की भव्य मूर्ति के दर्शन के साथ इस मंदिर से जुड़ी कई दिलचस्प बातें हैं जिसके बारे में कम लोग जानते हैं। तो आइए आज हम आपको इस मंदिर के रहस्य के बारे में बताते हैं।

क्यों कहा जाता है सिद्धिविनायक?

सिद्धिविनायक, भगवान गणेश जी का सबसे लोकप्रिय रूप है, जिसमें उनकी सूंड दाईं और मुडी होती है। वे सिद्घपीठ से जुड़ी होती हैं और उनके मंदिर सिद्घिविनायक मंदिर कहलाते हैं।  जानकारी के अनुसार गणेश की ऐसी प्रतिमा वाले मंदिर सिद्धपीठ कहलाते हैं, और इसलिए उन्हें सिद्धिविनायक मंदिर की संज्ञा दी जाती है। माना जाता है सिद्धिविनायक सच्चे मन से मांगी गई भक्तों की मुराद अवश्य पूरी करते हैं।

सिद्धिविनायक मंदिर की बनावट

मंदिर के बारे में बताया जाता है कि सिद्धिविनायक मंदिर की मूल संरचना पहले काफी छोटी थी। साथ ही मंदिर की प्रारंभिक संरचना सिर्फ ईटों की बनी हुई थी, जिसका गुंबद आकार का शिखर भी था। बाद में इस मंदिर का पुननिर्माण कर आकार को बढ़ाया गया।

कैसे हुआ निर्माण

सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक गणपति बप्पा के सिद्धिविनायक मंदिर का निर्माण 19 नवंबर 1801 को एक लक्ष्मण विथु पाटिल नाम के एक स्थानीय ठेकेदार द्वारा किया गया था। बहुत कम लोग इस बात को जानते हैं कि इस मंदिर के निर्माण में लगने वाली धनराशि एक कृषक महिला ने दी थी, कहा जाता है कि उस महिला के कोई संतान नहीं थी, उस महिला ने बप्पा के मंदिर के निर्माण के लिए मदद करने की इच्छा जताई थी। वह चाहती थी कि मंदिर में आकर भगवान के आर्शीवाद पाकर कोई महिला बांझ न रहे, सबको संतान की प्राप्ति हो।

मंदिर की विशेषता

इस मंदिर की विशेषता यह है कि इस मंदिर के द्वार हर धर्म के लोगों के लिए हमेशा खुले रहते हैं यहां किसी तरह की कोई मनाही नहीं है। सिद्धि विनायक मंदिर में मंगलवार को होने वाली आरती बहुत प्रसिद्ध है जिसमें श्रद्धालुओं की लाइन 2 किलोमीटर तक लंबी लगती है।

मूर्ति का स्वरूप

गणेश जी की मूर्ति काले पत्थर से बनाई गई है जिसकी सूंड दाई तरफ है। यहां भगवान गणेश अपनी दोनों पत्नी रिद्धि और सिद्धि के साथ विराजमान हैं। ये प्रतिमाएं देखने में काफी आकर्षक लगती हैं। मंदिर के दर्शन शुभ फलदायी माने गए हैं।

अमीर मंदिर

सिद्धिविनायक मंदिर की गिनती भारत के सबसे अमीर मंदिरों में की जाती है, जानकारी के मुताबिक  यह मंदिर हर साल 100 से मिलियन से 150 मिलियन धनराशि दान के रूप में प्राप्त करता है। इस मंदिर की देखरेख करने वाली संस्था मुंबई की सबसे अमीर ट्रस्ट है।

चांदी के चूहे

मंदिर के अंदर चांदी से बने चूहों की दो बड़ी मूर्तियां भी हैं मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु उनके कानों में अपनी मनोकामनाएं बताते हैं तो चूहे आपका संदेश भगवान गणेश तक पहुंचाते हैं। इसलिए यह धार्मिक क्रिया करते हुए आपको बहुत से श्रद्धालु मंदिर में दिख सकते हैं।

मंदिर का गर्भगृह

जानकारी के अनुसार नवनिर्मित मंदिर के गर्भगृह को इस तरह बनाया गया है ताकि अधिक से अधिक भक्त गणपति का सभामंडप से सीधे दर्शन कर सकें। पहले मंजिल की गैलरियां भी इस तरह बनाई गई हैं कि भक्त वहां से भी सीधे दर्शन कर सकते हैं। अष्टभुजी गर्भग्रह तकरीबन 10 फीट चौड़ा और 13 फीट ऊंचा है। गर्भग्रह के चबूतरे पर स्वर्ण शिखर वाला चांदी का सुंदर मंडप है, जिसमें सिद्धि विनायक विराजते हैं। गर्भग्रह में भक्तों के जाने के लिए तीन दरवाजे हैं, जिन पर अष्टविनायक, अष्टलक्ष्मी और दशावतार की बनी हुई चित्र हैं। हर साल गणपति पूजा महोत्सव यहां भाद्रपद की चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक विशेष समारोह पूर्वक मनाया जाता है।

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