दूसरों का भला करने से बड़ा कोई धर्म नहीं : सरजू दासानन्द

कलयुग में भगवान का नाम स्मरण तथा दूसरों के लिए सदैव हितकारी सोचना कल्याणकारी है । इस संसार में आकर लोगों के निंदा करने वाला व्यक्ति कभी भी मोक्ष प्राप्त नहीं कर पाता है । मुक्ति के लिए निंदा, काम, क्रोध, ईर्ष्या, लोभ का त्याग करना चाहिए । यह प्रवचन शास्त्री आचार्य सरजू दास आनंद ने कहे । नैमिषारण्य स्थित कालीपीठ संस्थान के कथा प्रांगण में कालीपीठाधीश्वर गोपाल शास्त्री के सानिध्य में सात दिवसीय भागवत कथा का आयोजन हो रहा है ।

धर्म

कथा प्रसंग में भागवत व्यास सरजुदासानन्द ने कहा कि जब जब भी धरती पर आसुरी शक्ति हावी हुई । परमात्मा ने धर्म की रक्षा के लिए अवतार लेकर पृथ्वी पर धर्म की स्थापना की। मथुरा में राजा कंस के अत्याचारों से व्यथित होकर धरती की करुण पुकार सुनकर नारायण ने कृष्ण रुप में देवकी के अष्टम पुत्र के रूप में जन्म लिया और धर्म और प्रजा की रक्षा कर कंस का अंत किया ।

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उन्होंने रामकथा का संक्षिप्त में वर्णन करते हुए कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने धरती को राक्षसों से मुक्त करने के लिए अवतार धारण किया। कथा में कृष्ण जन्म का वर्णन होने पर समूचा पांडाल खुशी से झूम उठा। मौजूद श्रद्धालु भगवान कृष्ण के जय जयकार के साथ झूमकर कृष्ण जन्म की खुशियां मनाई । इस मौके पर कालीपीठ संचालक भास्कर शास्त्री ने बताया कि कथा के पाँचवें दिन गोवर्धन लीला की कथा सुनाई जाएगी ।

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