​यूपी पंचायत चुनाव : सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इंकार, अंतिम सूची पर होगा चुनाव

उत्तर प्रदेश में होने जा रहे त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर चल रही अटकलों पर शुक्रवार को उस समय विराम लग गया जब सुप्रीम कोर्ट ने दायर याचिका की सुनवाई करने से इंकार कर दिया। याचिका पर सुनवाई न होने से अब नई आरक्षण की अंतिम सूची के अनुसार ही उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतर सकेंगे। इसके साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग ने भी चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया। ऐसे में अब ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी हलचल बढ़ना लाजिमी है और प्रशासन भी चुनावी तैयारियों को लेकर पूरी तरह से सजग हो गया है।

उत्तर प्रदेश ​विधानसभा चुनाव से पहले होने जा रहे त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को सभी राजनीतिक पार्टियां इसको सेमीफाइनल के रुप में देख रहे हैं। करीब दो माह से पंचायत चुनाव को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी हलचलें लगातार बढ़ रही हैं। शासन ने आरक्षण नीति में बदलाव करते हुए आरक्षण सूची जारी करने का आदेश पंचायत विभाग को दिया। इसके बाद पंचायत विभाग ने दो मार्च को अनंतिम आरक्षण सूची जारी कर दी और अंतिम सूची जारी होने से पहले उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने शासन की आरक्षण नीति को खारिज करते हुए नई आरक्षण नीति लागू करने का आदेश दिया।

उच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार प्रदेश के सभी जनपदों से नई आरक्षण नीति के तहत अनंतिम सूची 20 से 22 मार्च के बीच जारी कर दी गयी। 24 और 25 मार्च को आपत्तियों का निस्तारण कर अंतिम सूची भी शुक्रवार को जारी कर दी गई। इसके बाद भी संभावित उम्मीदवारों की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी रहीं और एक—दूसरे से जानकारी लेते रहें। यह ऐसे उम्मीदवार है जिनकी सीट नई आरक्षण सूची से उनके अनुरुप नहीं है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने दायर याचिका की सुनवाई करने से इंकार कर दिया और अंतिम सूची के अनुसार ही अब चुनाव कराये जाएंगे। वहीं राज्य निर्वाचन आयोग ने भी चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया, जिससे अब सीट बदलने की संभावना ​पर पूर्ण विराम लग गया और सीट बदलने की ख्वाहिश देखने वाले उम्मीदवारों को अब पांच साल का और इंतजार करना पड़ेगा। जिला पंचायत राज अधिकारी कमल किशोर ने बताया कि शासन को अंतिम आरक्षण सूची भेज दी गयी है और इसी सूची के अनुसार पंचायत चुनाव कराएं जाएंगे। जिलाधिकारी आलोक तिवारी ने कहा कि चुनाव को लेकर पूरी तैयारियां कर ली गयी हैं, किसी भी प्रकार से चुनाव में दखलंदाजी नहीं होने दिया जाएगा और शांतिपूर्ण चुनाव कराया जाएगा।

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