आज 93 साल के हो गए लाल कृष्‍ण आडवाणी, पीएम मोदी ने केक खिलाकर लिया आशीर्वाद

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्‍ठ नेता और देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्‍ण आडवाणी का आज जन्‍मदिन है। वह आज 93 साल के हो गए। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ गृह मंत्री अमित शाह उनके आवास पर पहुंचे। यहां पर पीएम मोदी ने आडवाणी को केक खिलाया और उनसे आशीर्वाद लिया।

लाल कृष्‍ण आडवाणी

बता दें कि लाल कृष्ण आडवाणी बीजेपी के उन वरिष्ठतम नेताओं में से हैं, जिन्होंने दशकों तक बीजेपी को सशक्त बनाने के लिए मेहनत की। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन की अगुआई की तो वहीं अब राम मंदिर को बनता हुआ भी देखेंगे। ऐसे में आइए आज हम आपको बताते हैं लाल कृष्ण आडवाणी के जीवन से जुड़ी कुछ अनकही बातें… 

लाल कृष्‍ण आडवाणी का परिचय

लाल कृष्ण आडवाणी का जन्म कराची (अब पाकिस्तान) में 1927 में हुआ था। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक के तौर पर अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। बीजेपी को फर्स से अर्स तक लाने का श्रेय लाल कृष्ण आडवाणी को ही जाता है। आडवाणी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे। 1997 में मोरारजी देसाई की सरकार में वह सूचना और प्रसारण मंत्री रहे। वहीं इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वह दो बार गृह मंत्री (1998-99, 1999-2004) और उप प्रधानमंत्री (2002 से 2004) भी रह चुके हैं।

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राजनीति में अटल-आडवाणी की जोड़ी सबकी चहेती रही है। दोनों के कई किस्से सुनने को मिलते हैं। ऐसा ही एक किस्सा है 1995 का जब वाजपेयी ने आडवाणी को जन्मदिन पर सरप्राइज दिया। इसी दौरान माहौल ऐसा भी बना कि वाजपेयी ने आडवाणी के बगल में बैठने से भी इनकार कर दिया और आडवाणी की पत्नी कमला आडवाणी को अपनी कुर्सी दे दी।

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7 नंवबर 1995 में पुणे के होटल अरोड़ा टावर में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक निर्धारित थी। अटल सहित तमाम नेता होटल में पहुंच चुके थे। तभी जिक्र हुआ कि कल यानि 8 नवंबर को आडवाणी जी का जन्मदिन है। तुरंत उनके जन्मदिन के आयोजन की तैयारी हुई। होटल के मालिक दत्तात्रेय चितले ने आडवाणी और अटल के पसंदीदा भोजन की व्यवस्था करवाई।

वहीं इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी के आमंत्रण पर आडवाणी भी 7 नवंबर की शाम को होटल पहुंच गए। योजना के अनुसार, वाजपेयी को होटल में 12 बजे ठीक आधी रात को आडवाणी को जन्मदिन की बधाई देनी थी। इसके लिए एक मंच तैयार किया गया। मंच पर दो कुर्सियां रखीं गईं। एक अटल बिहारी वाजपेयी के लिए और दूसरी लाल कृष्‍ण आडवाणी के लिए। रात के खाने के बाद, कार्यसमिति के सभी सदस्य मंच के पास एकत्रित हुए और सभी ने आडवाणी और वाजपेयी से मंच पर दोनों कुर्सियों पर आने का आग्रह किया।

अचानक वाजपेयी ने आडवाणी के पास बैठने से इनकार कर दिया। सब हैरान रह गए। तुरंत ही वाजपेयी ने इस भ्रम को दूर कर दिया और कहा, कुर्सी आज कमला जी (आडवाणी की पत्नी) की है। उन्होंने सुनिश्चित किया कि कमला जी ही आडवाणी के बगल में बैठें और उसके बाद ही कार्यक्रम शुरू हुआ। इस तरह लाल कृष्‍ण आडवाणी के लिए यह जन्मदिन यादगार बना।

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