उज्जैन में गधों के मेले की परंपरा, गधों के बीच कंगना और आर्यन!

इन दनों उज्जैन में लगे गधों के मेले में सबके आकर्षण का केंद्र है। दरअसल, उज्जैन में गधों के मेले की परंपरा है। पिछले साल कोरोना की वजह से यह मेला नहीं लग पाया था लेकिन इस बार मेला लगा है। मेले में जो गधे खरीदे जा रहे हैं उनमें से दो के नाम कंगना और आर्यन है। इतना ही नही वैक्सीन नाम का गधा भी यहां है। कंगना और आर्यन को 34 हजार रुपए में एक ईट-भट्टा व्यापारी ने खरीदा है। वैक्सीन नाम के गधे के दाम 14 हजार रुपये है। इस मेले में कई नस्ल के गधे भी मिल जाएंगे। भूरी नाम की घोड़ी और बादल नाम के घोड़े की कीमत एक लाख रुपये से ज्यादा है। मेले से खरीदे जाने वाले गधे माल ढुलाई में इस्तेमाल होते हैं। ज्यादातर को ईंट-भट्टों पर लगाया जाता है।  

उज्जैन

गधों के व्यापारी कमल प्रजापत बताते हैं कि इस बार भी गधों के मेले में रौनक नहीं रही। इस कारण धंधा नहीं हो पाया। पहले गधों का इस्तेमाल ट्रांसपोर्टेशन में भी किया जाता था। अब केवल माल ढुलाई उसमें भी सबसे ज्यादा बिल्डिंग मटेरियल की ढुलाई के काम आ रहे हैं। इसके अलावा, ईंट-भट्‌टों में भी किया जाता है।

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यहाँ आए लोग गधों की दांत देखकर गधे खरीदते हैं। इनके तीन दांत होते हैं। जितनी कम उम्र के होते हैं, उतना ज्यादा पैसा मिलता है। दांत का साइज भी देखा जाता है। अमूमन गधों की कीमत 3 हजार रुपए से शुरू होती है। इनकी अधिकतम उम्र 4 से 5 साल होती है। इसके बाद बूढ़ा हो जाता है।

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