खरी-खरी: बड़ी दूर की सूझी

Urmil Kumar Thapliyal

उर्मिल कुमार थपलियाल

नेता हो सदाचारी, अफसर ईमानदार।
जनता के भले के लिए मेहनत करे सरकार।।
रिश्वत हो बंद, बंद सभी चोरी-डकैती।
हर मािफया-दबंग, बंद करे बकैती।।
भूखे की थी पहेली, कंगाल ने बूझी।
अंधे को अंधेरे में, बड़ी दूर की सूझी।
दफ्तर भी चुस्त और दुरुस्त रहे कामकाज।
सड़कों पे जाम-बंद हो, सस्ता मिले अनाज।।
बिजली रहे पानी रहे, झोली न हो खाली।
घर-घर में ईद की खुशी, घर-घर में दिवाली।।
ये ख्वाब भंगेड़ी का है, भांग है भूजी।
अंधे को अंधेरे में, बड़ी दूर की सूझी।।
रोगी को अस्पताल में, डॉक्टर मिले-दवा मिले।।
जनता को गर्मियों में, ठंडी हवा मिले।।
हों दाखिल स्कूल में, बच्चे सभी पढ़ें।
मिल-जुल के रहें नेता, आपस में ना लड़ें।।
बेपर की उड़ान कोई और न दूजी।
अंधे को अंधेरे में, बड़ी दूर की सूझी।।

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