खरी खरी : मदारी जमूरे का स्वांग

Urmil Kumar Thapliyal

उर्मिल कुमार थपलियाल

मदारी- आइये हुजूर। चश्मेबद्दूर।
जमूरा- कभी बनारस कभी चिकमंगलू
मदारी- काले बामन का डसा कभी पानी न पिये।
जमूरा- महंगे डीजल-पेट्रोल की जगह सस्ती दारू पिये।
मदारी- सचिवालय का क्या मतलब?
जमूरा- अफसर करे न चाकरी बाबू करे न काम।
मदारी- खाद्य मंत्री कह रहे सबके दाता राम। जब काम न आया कोई ताबीज कोई गंडा।
जमूरा- तब काम आया योगी जी का डंडा।
मदारी- तू था कहां जमूरे।
जमूरा- लंगर में था। नौकर से खाना मंगवा रहा था।
मदारी- क्या कोरोना अपनी मौत मरेगा।
जमूरा- दूसरे की मौत कौन मरता है।
मदारी- सरकार कैसी चल रही है।
जमूरा- पहले राम भरोसे थी। अब श्रीराम भरोसे।
मदारी- सुना है महंगाई बढ़ रही है।
जमूरा- गलत। लोगों का स्टेंडर्ड ऑफ लिविंग बढ़ रहा है। मूरख उस्ताद।
मदारी- राजनैतिक दल क्या कर रहे हैं?
जमूरा- अपने-अपने हम्मामों में नंगें होकर नहा रहे हैं।
मदारी- कांग्रेस क्या कर रही है।
जमूरा- दूसरों के फटे में टांग अड़ा रही है।
मदारी- अरे सामने देख त्योहारों के दिन आ रहे हैं।
जमूरा- मैंने भीख का कटोरा पकड़ लिया है उस्ताद।
मदारी- मैं तुझे एक कौड़ी भीख नहीं दूंगा।
जमूरा- भिखमंगे भीख कहां देते हैं उस्ताद।
मदारी- तोड़-फोड़ में क्या फर्क है।
जमूरा- जिसे छोड़ा जाय वो दोस्ती। जिसे तोड़ा जाय उसे कानून कहते हैं।
मदारी- बदचलन कौन होता है।
जमूरा- जिसके पास चाल चलन हो।
मदारी- तू इतना ठंडा क्यूं बोल रहा है।
जमूरा- दगा हुआ ट्रांसफॉर्मर हूं उस्ताद।
मदारी- आजकल क्या कर रहा है।
जमूरा- जूतियों से दाल परोस रहा हूं।
मदारी- अरे मूर्ख। नवरात्र आ रहे हैं। पता है क्या होगा।
जमूरा- हां पता है। नौ दिनों तक दुर्गा-दुर्गा। दसवें दिन मुर्गा-मुर्गा।
मदारी- अरे द्रोपदी चिल्ला रही है। बचाओ-बचाओ कर रही है। कृष्ण कहां हैं?
जमूरा- गोकुल में राधारानी के साथ बिजी हैं।
आदाब

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