उत्तराखंड आपदा : सीएम त्रिवेंद्र ने याद रखा 2013 का सबक, नहीं की विजय बहुगुणा वाली गलती

देहरादून उत्तराखंड के चमोली जिले मे प्राकृतिक आपदा के ताजे रूप ने 2013 की कड़वी यादों को फिर ताजा कर दिया। 2013 की आपदा से पूरी सरकारी मशीनरी ने कितना सबक लिया है, यह जान-माल के नुकसान के सामने आने के बाद पता चलेगा, लेकिन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का तुरंत प्रभावित इलाके में पहुंचना बहुत कुछ बयान करता है। साफ है सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पूर्व सीएम विजय बहुगुणा की गलती से काफी कुछ सीखा है। 2013 में केदारनाथ आपदा के दौरान बहुगुणा बहुत देर में प्रभावित इलाकों में पहुंचे थे। इस देरी ने बहुगुणा को सीएम की कुर्सी से उतारने में अहम भूमिका निभाई थी।

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कोरोना की लड़ाई का नेतृत्व उत्तराखंड में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बखूबी किया और प्रदेश बहुत बडे़ नुकसान से बचा रहा। अब चमोली जिले की प्राकृतिक आपदा ने सरकार के सामने बड़ी चुनौती पेश की है। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत अपने चार साल के कार्यकाल में प्राकृतिक आपदा के लिहाज से सबसे बड़ी चुनौती से फिलहाल दो-चार हैं। सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग का कामकाज नए सिरे से कसौटी पर है।

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कोरोना की लड़ाई का नेतृत्व उत्तराखंड में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बखूबी किया और प्रदेश बहुत बडे़ नुकसान से बचा रहा। अब चमोली जिले की प्राकृतिक आपदा ने सरकार के सामने बड़ी चुनौती पेश की है। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत अपने चार साल के कार्यकाल में प्राकृतिक आपदा के लिहाज से सबसे बड़ी चुनौती से फिलहाल दो-चार हैं। सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग का कामकाज नए सिरे से कसौटी पर है।

सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सरकारी मशीनरी को एक्टिव करने के लिए सबसे पहले प्रभावित क्षेत्र में पहुंचने का निर्णय किया और सीधे जोशीमठ पहुंच गए। वह हवाई सर्वेक्षण से जान-माल के नुकसान का आकलन कर रहे हैं। सीएम की ओर से किसी भी तरह की मदद के लिए सोशल मीडिया पर जरूरी नंबर भी जारी कर दिए गए हैं। सीएम ने गृह मंत्रालय से संपर्क करने और वहां से पूरी मदद के भरोसे की बात मीडिया से साझी की है।

दरअसल, 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद प्रशासनिक तौर पर सरकार की सबसे बड़ी विफलता सामने आई थी, जबकि सबसे प्रभावित रुद्रप्रयाग जिले में कई दिनों तक कोई डीएम ही नहीं था। इसके अलावा, जितनी बड़ी त्रासदी थी, उसमें न सरकार और न ही उसका प्रशासनिक अमला मजबूती से लड़ता हुआ दिखाई दिया। इस ताजा आपदा में जान-माल के ब्योरे सामने आने के बाद सारी स्थिति साफ हो पाएगी, लेकिन इसने कहीं न कहीं 2013 की यादों को आम आदमी के जेहन में ताजा जरूर कर दिया है।

उत्तराखंड सरकार पूरी ताकत से आपदा प्रबंधन पर फोकस किए हुए है। विधानसभा चुनाव से साल भर पहले इस प्राकृतिक आपदा के बाद प्रबंधन की स्थिति में जरा सी भी ऊंच-नीच का सीधा मतलब इसका सियासी मुद्दा बन जाना होगा। हालांकि शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक का कहना है कि सरकार ने सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई की है। सीएम खुद प्रभावित इलाके में पहुंचे हैं और संबंधित प्रशासन और अन्य एजेंसियों को उचित कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

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