फेस्टिवल पैकेज पर विफरा कर्मचारी परिषद, दीपावली बोनस देने की मांग

लखनऊ। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने राज्य के 16 लाख कर्मचारियों को स्पेशल फेस्टिवल पैकेज को शुद्ध व्यापारिक, कमाऊ और कर्मचारियों को बरगलाने वाला करार दिया है। परिषद ने सरकार से कर्मचारियों, पेंशनर्स का हड़पा गया डीए लौटाने और पहले की तरह राज्य कर्मचारियों को दीपावली बोनस का भुगतान करने की मांग की है।

परिषद के अध्यक्ष इं. हरिकिशोंर तिवारी और महामंत्री शिवबरन सिंह यादव ने रविवार को ब्यान जारी कर कहा कि कोरोना काल में योद्धा की तरह काम करने वाले कर्मचारियों से पहले ही कई तरह के भत्ते छीन चुकी सरकार ने अब उन्हें बोनस से वंचित रखने के लिए ब्याज मुक्त कर्ज की टाॅफी दी है।

परिषद नेताओं ने कहा कि सरकार के दावे के विपरीत शासनादेश इस बाॅत के साफ संकेत दे रहा है कि इस दस हजार को लेते ही कर्मचारी के पास से 7200 रूपये टैक्स के रूप में सरकार के पास पहुच जाएगा। अर्थात सरकार दस हजार रूपये एडवांस देकर वाहवाही लूटेगी और कर्मचारी को इसके लिए 7200 रूपये टैक्स के देने होगे।

नेताद्वय ने कहा कि दस हजार एडवांस लेने पर भी कर्मचारी को अपने पास से तीस हजार रूपये मिलाकर वह खरीददारी करनी होगी, जिस पर 12 प्रतिशत से अधिक जीएसटी लागू है। अर्थात आप उस पैसे को तभी खर्च कर पाएगें जब चालीस हजार की खरीददारी करेगें। इससे सरकार की नकामी भी छिपेगी। दू

परिषद नेताओं ने कहा कि अभी तक सरकार के डीए/डीआर फ्रीज करने के आदेश से कर्मचारियों का काफी धन प्रतिमाह नहीं मिल रहा है और अब खर्चा चलाने के लिए एडवांस देने की बात कर रही हैं, जिससे अर्थव्यवस्था में कुछ जान आ सके। परिषद ने सरकार से कर्मचारियों, पेंशनर्स का डीए/डीआर उन्हें लौटाने और कर्जदार होने से बचाने के लिए उन्हें पहले की तरह दीपावली बोनस का भुगतान करने की मांग की है।

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