संपादकीय : सीबीआई के लिए बड़ी चुनौती

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हाथरस गैंगरेप मामले की जांच सीबीआई ने अपने हाथ में लेकर जांच शुरू कर दी है।इसके साथ ही पीड़िता को इंसाफ मिलने की उम्मीद अपनी मंजिल पर पहुंचती दिख रही है। सीबीआई ने बयानबाजी, दावे-प्रतिदावे और कई सनसनीखेज थ्योरी के बाद हाथरस केस को अपने हाथ में लिया है। साथ ही घटना को लगभग 27 दिन हो चुके हैं। इतने दिनों बाद भी इससे जुड़े तमाम सवाल जस के तस बने हुए हैं। अब यह केंद्रीय एजेंसी के सामने इन सवालों के रहस्य से पर्दा उठाने की चुनौती भी कम नहीं है।

हाथरस के बूलगढ़ी मामले की पहले हाथरस पुलिस, फिर एसआईटी और अब सीबीआई ने तफ्तीश शुरू कर रही है। देश की सबसे अहम और आपराधिक मामलों की जांच में माहिर मानी जाने वाली एजेंसी के जांच हाथ में लेने से यह बात तय है कि अब लोगों को उम्मीद बंधी है कि वह ऐसे तथ्य, गवाह और सबूत लेकर आएगी, जिससे इस मामले में सब कुछ साफ हो जाएगा। हालांकि अब तक इस मामले की जांच एसआईटी कर रही थी।

घटना के दिन यानी 14 सितंबर का सच जानने के लिए एसआईटी ने जब जांच शुरू की तो उसके दायरे में गांव के 40 लोग थे, जिनसे सवाल किए जा चुके हैं या कुछ से अभी किए जाने हैं। इन 40 लोगों में वे शामिल हैं जो 14 सितंबर को आसपास के खेतों में काम कर रहे थे। आरोपी और पीड़िता के घर वाले भी इनमें शामिल हैं। बता दें कि हाईकोर्ट भी इस केस में दखल दे चुका है। सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है और कोर्ट ने गृह व पुलिस विभाग के अधिकारियों को रिपोर्ट के साथ तलब किया है।

जहां तक बात है तो सीबीआई और एसआईटी की जांच के बीच कुछ बुनियादी सवाल हैं जो हर किसी के जेहन में उमड़—घुमड़ रहे हैं। इनमें सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर 14 सितंबर को खेत में लड़की को किसने मारा? वहीं लड़की ने पहले दिन वाले बयान में अपने साथ कथित बलात्कार की बात क्यों नहीं की? सवाल यह भी गहराया हुआ है कि पीड़िता ने आखिरी बयान में बलात्कार की बात की, लेकिन मेडिकल रिपोर्ट इसके विपरीत क्यों है? इतना ही नहीं वह सवाल भी अहम है जिसकी वजह से पूरा मामला देश में चर्चा का सबब बन गया कि 29 सितंबर को पीड़िता की मौत के बाद आनन-फानन में रात के अंधेरे में उसकी लाश क्यों जला दी गई?

ये ऐसे सवाल हैं, जिसके रहस्य से सीबीआई को तलाशने होंगे। यह तय है कि सीबीआई को एसआईटी की अब तक की पड़ताल से मदद भी मिलेगी। लेकिन, एक बड़ा पेंच यह भी है कि पीड़िता के परिवार को सीबीआई जांच पर भरोसा ही नहीं है। पीड़ित परिवार इस पर अड़ा है कि उन्हें सिर्फ और सिर्फ न्यायिक जांच पर ही भरोसा है। इससे पहले वह पुलिस और एसआईटी पर भी अविश्वास जताया था।

इसी आधार पर योगी सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। इस सिफारिश पर केंद्रीय एजेंसी ने जांच का जिम्मा संभाला। ऐसे में सीबीआई की​ जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी कर इसके रहस्य से पर्दा उठाये और पीड़ित परिवार के मन में जो उसकी जैसी एजेंसियों के प्रति ​अविश्वास घर कर चुका है उसे दूर करे।

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