संपादकीय – खुलता प्रदेश : अनलॉक-5

Unlock-5.0

फरवरी-मार्च के बाद देश में आए ब्रकेडाउन ने देश को आर्थिक रूप तो से पीछे धकेला ही है, सामाजिक और राजनीति रूप से भी स्थिर कर दिया है। बीते जून से इस स्थिति से उबरने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। कोरोना प्रसार के बाद गतिविधियां खोलने के पांचवे चरण में उत्तर प्रदेश सरकार ने अनलॉक-5 की गाइड लाइन जारी कर दी है। सभी कंटेनमेंट जोन में 31 अक्टूबर तक लॉकडाउन रहेगा। 15 अक्टूबर के बाद स्कूल-कॉलेजों को सशर्त खोले जाने की योजना है।

स्कूल खोले जाने का फैसला स्कूल प्रबंधन से विचार-विमर्श और स्थिति का आकलन कर लिया जाएगा। स्वास्थ्य एवं सुरक्षा सावधानियों के संबंध में शिक्षा विभाग द्वारा स्टेंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के आधार पर अनुमति जारी की जाएगी। जिन शिक्षण संस्थानों को एसओपी की अनुमति नहीं मिलेगी, उन्हें इसके प्रावधानों का पालन करना होगा, तब उन्हें अनुमति मिलेगी। महाविद्यालयों को भी उच्चा शिक्षा विभाग की सहमति और कोरोना की वर्तमान स्थिति के आकलन के बाद ही अनुमति मिलेगी। महाविद्यालयों को साइंस लैब खोलना हो तो केंद्र सरकार की गाइड लाइन के मुताबिक व्यवस्था करनी होगी।

ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा को अधिक प्रोत्साहित किया जाएगा। अगर कोई स्कूल और कुछ छात्र ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं, कुछ विद्यार्थी कक्षा में पढ़ने के इच्छुक हैं, ऐसे विद्यार्थियों को ऑनलाइन के लिए प्रेरित किया जाए। कुछ विद्यार्थी सिर्फ ऑनलाइन पढ़ना चाहते हैं तो प्रबंधकों से ऐसी कक्षाएं चलाने को कहा जाएगा। यह भी बात है कि विद्यार्थी, अभिभावकों की लिखित अनुमति के बाद ही अपने स्कूल-कॉलेज में उपस्थित हो सकेंगे। कोई भी कॉलेज माता-पिता की अनुमति के बिना विद्यार्थियों को अनिवार्य रूप से बुला नहीं सकेगा।

साथ ही पंद्रह अक्टूबर से सिनेमाहॉल और मल्टीप्लेक्स भी आधी क्षमता के साथ ही खोले जाएंगे। दिशा-निर्देश मुख्य सचिव के आदेश से जारी किए गए। केंद्रीय खेल मंत्रालय की गाइड लाइंस के आधार पर इसी दिन से स्वीमिंग पूल और मनोरंजन पार्क खोले जा सकेंगे। दो सौ लोगों की मौजूदगी वाले सभी सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक कार्यक्रम कराये जा सकेंगे। मगर ये आयोजन जहां हों, वहां पर बैठने की क्षमता चार सौ लोगों की होनी चाहिए।

यानि सरकार अनलॉक की प्रक्रिया जारी तो रखे हुए है, मगर कोरोना की छाया से मुक्ति अभी नहीं मिली है। सरकार पर आर्थिक गतिविधियां शुरू करने का दबाव तो है ही देश-प्रदेश को पूर्ववत रफ्तार में लाने का भी नैतिक दबाव है। इससे भी बड़ी बात, कोरोना का प्रभाव कम नहीं हुआ है मगर अनलॉक की प्रक्रिया चालू है तो फिर से लॉकडाउन तो किया नहीं जा सकता। इतना गनीमत है कि कोरोना की रफ्तार स्थिर होते दिख रही है। आबादी अधिक है, कोरोना गायब होते-होते भी वक्त लगेगा।

स्कूल-कॉलेज नहीं खुलते हैं तो पढ़ाई पटरी पर आ पाना संभव नहीं, विद्यार्थियों का साल भी खराब हो सकता है। ऑनलाइन पढ़ाई कितनी प्रभावकारी है, यह तो कुछ साल बाद पता चलेगा। अनुमान लगाने वाले कहते हैं कि ऑनलाइन पढ़ाई का स्तर दूरस्थ शिक्षा की भांति ही दिखता है। अगर इतनी कारगर शिक्षा प्रणाली होती तो अब तक बहुत से स्कूल-कॉलेजों के कैंपस बंद हो चुके होते। कितने बच्चे इलेक्ट्रानिक उपकरणों के सहारे मनोयोग से पढ़ पा रहे होंगे, ये तो उनके अभिभावक ही बता सकते हैं। घरों में सर्वे किया जाए तो जागरूक अभिभावक बता देंगे कि पढ़ाई के दौरान उनके बच्चे कितना मन लगाते हैं। फिलहाल, देश को खोलना मजबूरी है। सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक कार्यक्रम भी होने हैं। ऐसे में कोरोना प्रोटोकॉल के तहत ही सभी गतिविधियां चलती रहें, यही व्यक्ति और देश दोनों के हित में है।

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