संपादकीय : बेवजह बहस क्यों

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने एक बार फिर चीन को स्पष्ट शब्दों में बता दिया है कि हम दो-दो हाथ करने को तैयार हैं। लोकसभा के बाद आज उन्होंने राज्यसभा में भी देश को आश्वस्त किया कि हमारी सेनाएं किसी भी मुकाबले के लिए तैयार हैं। हम देश का मस्तक झुकने नहीं देंगे। इससे पहले लोकसभा में भी उन्होंने देश को यह स्पष्ट कर दिया था कि भारत पर कितने भूभाग में चीन का अनैतिक कब्जा है, जो लंबे समय से चला आ रहा है। सीमा पर क्या हालात हैं यह किसी से छुपा हुआ नहीं है। फिर रक्षामंत्री ने स्थिति को लगभग पूरी तरह से स्पष्ट करते बता दिया था कि हमारी सेनाएं हर मुकाबले के लिए सक्षम हैं।

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इन सबके बीच विपक्ष उसमें भी मुख्य रूप से कांग्रेस इस बात पर अड़ी हुई है कि सदन में चीन पर चर्चा होनी ही चाहिए। जबकि सरकार का स्पष्ट मत है एलएसी पर चीन के साथ तनातनी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा करना ठीक नहीं है। संसद सत्र शुरू होने से पहले ही विपक्ष यह शोर मचाने लगा था कि चीन कुछ हो न हो लेकिन चीन पर तो चर्चा होनी ही चाहिए। सर्वदलीय बैठक में इस बात के स्पष्ट संकेत दिए गए थे कि राजनाथ सिंह दोनों में चीन के हालात पर अपना बयान देंगे उस पर विपक्ष चाहे तो संक्षिप्त स्पष्टीकरण की मांग कर सकता है।

लेकिन कांग्रेस को चर्चा कर बहस कराने की मांग पर ही अड़ी हुई है। यही स्थिति उसकी राफेल पर थी अन्तत: मसला सुप्रीम कोर्ट में चला गया। हाई कोर्ट ने भी सरकार को एक तरह से क्लीन चिट देकर राहत दे चुका है।

सुरक्षा से जुड़े ऐसे मामलों में कांग्रेस का यह बचपना समझ से परे है। क्योंकि राफेल पर 2019 का चुनाव लड़ डाला। लगभग हर सभा में राहुल ने राफेल को लेकर प्रधानमंत्री मोदी को घेरा, घेरा ही नहीं उन्हें चोर तक कहलवा दिया। लेकिन नतीजा क्या रहा यह किसी से छुपा नहीं है। मोदी और ताकतवर बनकर उभरे। आज फिर राहुल उसी गति से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। लोकसभा में राजनाथ सिंह के बयान पर जिसपर उन्होंने स्वीकारा कि चीन ने हमारी भूमि पर कब्जा कर रखा है।

राहुल ने तुरंत ट्वीट कर मोदी को झूठा बना दिया और फिर शुरू हो गया कि सदन में इसपर बहस होनी चाहिए। राहुल ने अपने ट्वीट में लिखा कि मोदी ने देश को चीनी अतिक्रमण पर गुमराह किया है। हमारा देश सेना के साथ खड़ा है, लेकिन मोदी जी आप चीन के खिलाफ कब खड़े होंगे।

कांगेस को याद रखना होगा कि रक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर थोड़ा कम बोलना चाहिए। आप विपक्ष में हैं, लोकतांत्रिक व्यवस्था में सवाल उठाना आपका फर्ज है लेकिन समय की वस्तुस्थिति की गंभीरता को देखते हुए ऐसे मुद्दों पर थोड़ी समझदारी दिखानी चाहिए। क्योंकि इस मुद्दे को लेकर अगर विपक्ष सदन को नहीं चलने देगा तो इस सत्र में तमाम विधेयक पारित नहीं हो पाएंगे। संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने इस बात के संकेत दिए हैं कि अगर सहमति का अभाव रहा तो सत्र को आगे बढ़ाना पड़ेगा। कोरोना काल में यह उचित नहीं होगा। हां, यह बात सही है कि अर्थव्यवस्था, जीएसटी और नई शिक्षा नीति जैसे विषयों पर बहस हो इससे सार्थक नतीजे सामने आएंगे।

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