हाथरस : षड्यंत्र या सच्चाई

आलोक पाण्डेय- समाजसेवी

उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक दलित बेटी के साथ हुई दुर्घटना भारतीय समाज के लिए अत्यंत दुखद एवं निंदनीय है। ऐसी घटनाएं तो होनी ही नहीं चाहिए। प्रशासन में बैठे जिम्मेदार व्यक्तियों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए था कि उस बेटी के साथ हुए अन्याय को रोकने का प्रयास करते तथा न्याय दिलाने के लिए तत्पर दिखते। हाथरस घटना में जैसे ही राजनीतिक दलों के नेताओं ने बेटी को न्याय दिलाने के नाम पर राजनीति करना प्रारंभ किया, ऐसा लगा कि वास्तव में सरकार और प्रशासन ने पीड़ित परिवार के साथ अन्याय किया है। इसकी शुरुआत राहुल गांधी के राजनीतिक ड्रामे से होती है।

यह समाजवादी पार्टी, आप तथा कम्युनिस्ट पार्टी जैसे राजनीतिक दलों से होते हुए अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों तक पहुंच जाती है। इसके वहां तक पहुंचने से यह बात काफी हद तक सच नजर आने लगती है कि यह घटना हादसा रही हो या अपराध, इसकी आड़ में देश के अंदर सामाजिक विद्वेष बढ़ाकर जातीय व सांप्रदायिक दंगे भड़काने का प्रयास किया गया। ऐसा लगता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत के खिलाफ कुछ राष्ट्र देश के अंदर होने वाली कानून व्यवस्था की घटनाओं को राष्ट्र व समाज के विरुद्ध वैमनस्य फैलाने के लिए प्रयुक्त करना चाहते हैं।

हमें यह समझने की आवश्यकता है कि भारत एक राष्ट्र के रूप में तभी शक्तिशाली रह सकता है, जब वह न केवल राष्ट्रीय चुनौतियों को अच्छी तरह खत्म करे बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्याप्त भारत के खिलाफ षड्यंत्र से उत्पन्न खतरों से भी लड़ सके। लखनऊ में पुलिस द्वारा की गई  एफआईआर से यह  समझा जा सकता है कि हाथरस की घटना के विरोध प्रदर्शन को देश विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इसमें पीएफआई जैसे संगठन तथा  गैर सरकारी सामाजिक संगठनों  के शामिल होने का शक जताया गया है।

अगर यह सत्य है तो भारत के लिए एक नई चुनौती उत्पन्न हो रही है, जिसमें हमें न केवल धार्मिक विद्वेष फैलाने वालों से बचना होगा बल्कि जातीय विद्वेष से भी समाज को बचाना होगा, क्योंकि भारत अब एक उभरता हुआ राष्ट्र है, जिसमें सरकार व समाज मिलकर भारत को विश्व गुरु बनाने को तत्पर हैं। इस प्रकार से संभवतः देश के विरुद्ध चलने वाली संस्थायं अब नए-नए तरीके  से भारत सरकार तथा भारतीयों को बदनाम करने का प्रयास कर रही हैं।

प्रवर्तन निदेशालय की मानें तो हाथरस की घटना को लेकर उत्तर प्रदेश में साम्प्रदायिक दंगे कराने की बड़ी साजिश रची गयी थी। इसके लिए रातों-रात फर्जी मेल आईडी से वेबसाइट तैयार की गयी। 100 करोड़ की फंडिंग की गयी। इसमें अकेले मारिशस से ही 50 करोड़ रुपये आये थे।

जब यह फंड आया साजिशकर्ताओं ने बांटा भी होगा। हालांकि पीएफआई से जुड़े चार लोग गिरफ्तार किये गये हैं, लेकिन सिर्फ चार लोग तो इतनी बड़ी साजिश रच नहीं सकते।  जरूर इसके पीछे कोई शातिर मास्टर माइंड होगा। जरूरत इस बात की है कि उन सभी लोगों को दबोचा जाये, जिनके खातों में यह धनराशि भेजी गयी है। अगर तेजी के साथ जांच नहीं हुई तो साजिश रचने वाले सुरक्षित ठिकानों में पलायन कर जायेंगे।

एक सवाल और भी खड़ा होता है। वह यह कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और जयंत चौधरी पीड़िता के न्याय के पक्ष में सड़कों पर आ गये। उसके परिवार से मिलने पहुंच गये। क्या इन नेताओं को इस बात का तनिक भी आभास नहीं था कि इसके पीछे जातीय दंगे की साजिश रची गयी है। किसी भी पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए आवाज उठाना अनुचित नहीं है, लेकिन यह भी तो देखा जाना चाहिए कि कहीं इसके पीछे कोई षड्यंत्र तो नहीं है। इन सभी नेताओं ने बस एक ही बात देखी वह यह कि किसी भी तरह भाजपा को आतताई पार्टी साबित करना है। जनता की निगाहों में उसकी छवि धूमिल करना है।

अब जबकि साजिशकर्ताओं की परतें खुलने लगी हैं, तब इनके मुंह बंद हो गये हैं। किसी के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि हाथरस कांड की हकीकत क्या है। अब कोई यह नहीं कह रहा कि सरकार जनता के सामने फर्जी खुलासे कर रही है। ऐसे में अगर यह कहा जाये कि भाजपा को नीचा दिखाने के लिए ये नेता जाने-अनजाने देशविरोधियों के हाथ में खेल गये तो अनुचित नहीं होगा।

स्थिति यह है कि अब भाजपा हमलावर है और ये नेता बचाव की मुद्रा में आ गये हैं। यह साफ हो गया है कि हाथरस की बेटी को न्याय दिलाने के नाम पर सियासी रोटियां सेंकी जा रही थी। यह तो रोजनीतिक नेताओं की गतिविधियां थीं और इनकी आड़ में साम्प्रदायिक दंगे की आग लगाने वाले अलग ही ताना-बाना बुनने में मशगूल थे। यह तो सरकार और प्रशासन की बुद्धिमत्ता रही कि साजिश रचने वालों के मंसूबे पूरे नहीं हो सके। अगर ऐसा हो जाता तो भाजपा अपदस्थ होती या नहीं, यह अलग विषय है, लेकिन समाज तो दंगे की आग में जल ही रहा होता।

वर्तमान समय में भारतीयों को अब कड़ी परीक्षा के लिए  तैयार रहना चाहिए, क्योंकि समाज में कुछ असामाजिक तत्वों व  अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्रकारियों ने समझौता कर लिया है, जिसके द्वारा वह सरकार को बदनाम करके भारत में जारी  विकास प्रक्रिया को तोड़ना चाहते हैं। इसलिए हमें इस समय एकजुट होकर ऐसे षड्यंत्रकारियों के खिलाफ मजबूती से खड़ा रहना होगा। अगर हम ऐसा करने में सक्षम रहते हैं तो न केवल यह भारत के लिए बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए अत्यंत उपयोगी होगा, जिसमें भारत विश्व का नेतृत्व करेगा तथा संपूर्ण विश्व में शांति स्थापित होगी।

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